कोलकाता, 30 अक्टूबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): करीब 280 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई कोलकाता, हुगली जिले के उत्तरपाड़ा, पश्चिम बर्धमान के आसनसोल और हावड़ा में की जा रही है। मामला झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित करने के नाम पर बैंकों के समूह से लिए गए लगभग 280 करोड़ रुपये के ऋण के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
ED की जांच के अनुसार, कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड (KPPL) और उससे जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में बिजली परियोजना स्थापित करने के लिए बैंक कंसोर्टियम से ऋण प्राप्त किया था। आरोप है कि ऋण की राशि निर्धारित परियोजना पर खर्च करने के बजाय कई शेल कंपनियों के माध्यम से दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित कर दी गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस पूरी वित्तीय प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों और संदिग्ध लेन-देन का इस्तेमाल किया गया।
दो चार्टर्ड अकाउंटेंट जांच के घेरे में
ED की टीम ने उत्तरपाड़ा की शिवतला स्ट्रीट स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट सुदीप्तो घोष के आवास पर छापेमारी की। अधिकारियों ने उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और घर में मौजूद दस्तावेजों की तलाशी ली। जांच के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी तैनात रहे।
इसके अलावा, कोलकाता के लेक टाउन स्थित अवानी ऑक्सफोर्ड (फेज-1) आवासीय परिसर में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक सारथी के घर पर भी ED ने तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी को संदेह है कि अशोक सारथी ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनियों के माध्यम से धन के हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
SFIO की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला कोलकाता की विशेष अदालत में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की ओर से दाखिल शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेन-देन तथा कारोबारी गतिविधियों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।
केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने भी कंपनी के कामकाज की जांच के निर्देश दिए थे। यह कार्रवाई भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर सामने आए संदिग्ध लेन-देन से संबंधित है। इसमें उन कंपनियों का उल्लेख था, जिनके संबंध में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में संदिग्ध या अवॉइडेबल ट्रांजेक्शन को लेकर याचिकाएं दाखिल की थीं।
डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच
ED की टीमें छापेमारी के दौरान डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और कंपनियों के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक ऋण की राशि किन कंपनियों और खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई तथा इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
फिलहाल, यह कार्रवाई जांच का हिस्सा है। छापेमारी के बाद बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।






