शिमला, 2 नवंबर 2026 (छत्रपाल सिंह): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के संशोधित वेतन एवं सेवानिवृत्ति लाभों के बकाये का भुगतान रोकने या अनिश्चितकाल तक टालने की छूट देने वाली व्यवस्था पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनरों के कानूनी वित्तीय अधिकारों से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 31 अक्टूबर को दिए फैसले में कर्मचारियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसेज (रिवाइज्ड पे) रूल्स, 2022 के नियम 13 को उस सीमा तक अमान्य करार दिया, जिसके तहत सरकार को संशोधित वेतन बकाये के भुगतान का समय और तरीका अपनी मर्जी से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया था।
अदालत ने संशोधित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी के बकाये का भुगतान बाद में तय करने वाली व्यवस्थाओं को भी रद्द कर दिया। इसके साथ ही कम्यूटेड पेंशन की किस्तों में अदायगी और लीव एनकैशमेंट की राशि रोकने या देर से देने की कार्रवाई को भी अनुचित ठहराया।
दो किस्तों में करना होगा बकाये का भुगतान
हाईकोर्ट ने मुख्य याचिकाकर्ता को संशोधित वेतन और पात्र सेवानिवृत्ति लाभों का पूरा बकाया दो बराबर किस्तों में देने का निर्देश दिया है।
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पहली किस्त: 15 दिसंबर 2026 तक।
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दूसरी किस्त: 28 फरवरी 2027 तक।
इन लाभों में संशोधित पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेड पेंशन और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, जहां ये लागू होते हैं।
1 जून 2022 से मिलेगा 6 प्रतिशत ब्याज
अदालत ने सरकार को बकाया राशि पर 1 जून 2022 से वास्तविक भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया है। यह ब्याज पूरी बकाया राशि पर लागू होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 30 अक्टूबर 2026 तक अदालत में याचिका दायर नहीं करने वाले अन्य सरकारी कर्मचारी और पेंशनर भी अपने वैधानिक वित्तीय लाभ प्राप्त करने के हकदार रहेंगे। हालांकि, उन्हें मौजूदा याचिकाकर्ताओं की तरह 6 प्रतिशत ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार की आर्थिक तंगी वाली दलील खारिज
सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) बंद किए जाने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। इसी कारण बकाये का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जब सरकार ने संशोधित वेतन नियमों के तहत 1 जनवरी 2016 से कर्मचारियों और पेंशनरों के वित्तीय लाभ निर्धारित कर दिए हैं, तो बाद में प्रशासनिक आदेशों के जरिए इनका भुगतान अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है।
खंडपीठ ने पेंशनरों के साथ अलग-अलग व्यवहार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही श्रेणी के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ देना और दूसरों को लंबे समय तक इंतजार करवाना भेदभावपूर्ण है।
संविधान के अनुच्छेद 300-A का भी दिया हवाला
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 300-A का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के अर्जित वित्तीय लाभ उनके महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार हैं। सरकार मनमाने प्रशासनिक फैसलों के जरिए उन्हें इन अधिकारों से वंचित नहीं कर सकती।
हाईकोर्ट के इस फैसले को हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे राज्य सरकार पर लंबित वेतन और पेंशन बकाये के भुगतान की जिम्मेदारी बढ़ सकती है।






