Wednesday, November 4, 2026
HomeHaryanaहरियाणा में छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आधारित...

हरियाणा में छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता योजना

चंडीगढ़, 3 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार अपने प्रस्तावित ‘साथ’ प्रोजेक्ट के तहत छठी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए एक व्यवस्थित स्कूल आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव, चिंता (एंग्जायटी), डिप्रेशन, बुलिंग (धमकाना), सामाजिक अकेलेपन और अत्यधिक स्क्रीन के इस्तेमाल सहित विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय रहते पहचान करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस परियोजना के तहत स्वास्थ्य एवं स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थी स्वयंसेवकों, काउंसलरों, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्टों और मनोचिकित्सकों को शामिल करते हुए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

प्रस्तावित रूपरेखा के तहत पेशेवर सहायता प्रणाली के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य विभाग के 122 काउंसलरों को चिन्हित किया गया है। इसमें मनोविज्ञान की योग्यता रखने वाले शिक्षकों और विशेष मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भागीदारी भी शामिल होगी, ताकि पेशेवर सहायता की जरूरत वाले विद्यार्थियों को समय पर मदद मिल सके। विद्यार्थियों की अलग-अलग विकासात्मक और मनोवैज्ञानिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छठी से आठवीं तथा नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मुख्य रूप से भावनात्मक जागरूकता, आत्मविश्वास, किशोरावस्था से जुड़े बदलाव, परीक्षा की चिंता, बुलिंग, साथियों द्वारा उपेक्षा और अभिभावकों के साथ संवाद में आने वाली कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। शिक्षकों को शुरुआती लक्षणों जैसे लगातार उदास रहना, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, रोजमर्रा के कार्यों में रुचि कम होना, एकाग्रता की कमी, पढ़ाई के प्रदर्शन में गिरावट और स्कूल जाने में आनाकानी की पहचान करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा।

यह कार्यक्रम अत्यधिक गेमिंग, सोशल मीडिया पर निर्भरता, अनुचित ऑनलाइन सामग्री, नींद की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल से पैदा होने वाली समस्याओं का भी समाधान करेगा। इसके अलावा पारिवारिक विवाद, अभिभावकों का दबाव, भाई-बहनों के बीच तुलना, किसी प्रियजन को खोना तथा हिंसा या उपेक्षा का सामना करने जैसे उन कारकों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षाओं के दबाव, प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं, करियर को लेकर अनिश्चितता, असफलता के डर, साथियों के दबाव और मानसिक थकान पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही चिंता, डिप्रेशन से जुड़े लक्षणों, शारीरिक बनावट को लेकर चिंता (बॉडी इमेज), अस्वस्थ खान-पान की आदतों, रिश्तों में आने वाली परेशानियों और नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के विचारों से जुड़े चेतावनी संकेतों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों और नामित कर्मचारियों को ऐसी स्थितियों की पहचान करने तथा विद्यार्थियों को उचित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास तुरंत भेजने (रेफर करने) के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

अभिभावक और विद्यार्थी स्वयंसेवक भी होंगे शामिल

डॉ. सुमिता मिश्रा ने आगे बताया कि शिक्षक-अभिभावक बैठकें (PTM) मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेंगी। अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, मनोदशा, नींद के पैटर्न, पढ़ाई के प्रदर्शन और सामाजिक व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानने के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्हें बिना किसी डर या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों के बच्चों के साथ सहयोगात्मक तरीके से बातचीत करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

प्रोजेक्ट के तहत भाग लेने वाले स्कूलों में ‘स्टूडेंट हेल्थ एंबेसडर’ (विद्यार्थी स्वास्थ्य राजदूत) बनाने का भी प्रस्ताव है। एक वरिष्ठ विद्यार्थी स्वास्थ्य राजदूत को ‘साथ कोऑर्डिनेटर’ (SAATH Coordinator) के रूप में नामित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों और नामित स्कूल कर्मचारियों के बीच जागरूकता गतिविधियों तथा संवाद को सुचारू बनाएगा। उनकी भूमिका केवल साथियों के बीच जागरूकता फैलाने और सहयोगात्मक बातचीत तक सीमित रहेगी। वे किसी प्रकार की जांच या उपचार नहीं करेंगे।

पहचान और रेफरल के लिए पांच स्तरीय व्यवस्था

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा में पांच स्तरीय सहायता एवं रेफरल तंत्र की परिकल्पना की गई है, जो कक्षा स्तर से शुरू होकर जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक देखभाल तक पहुंचेगा।

पहले स्तर पर कक्षा शिक्षक विद्यार्थियों के व्यवहार या भावनात्मक बदलावों का निरीक्षण करेंगे, उनसे सहानुभूतिपूर्वक बातचीत करेंगे और स्कूल स्तर पर की गई गतिविधियों का रिकॉर्ड कक्षा के अनुसार ‘साथ आकलन एवं काउंसलिंग रजिस्टर’ में रखेंगे।

दूसरे स्तर पर विद्यार्थी स्वास्थ्य राजदूत और साथ कोऑर्डिनेटर अपने साथियों के बीच जागरूकता बढ़ाएंगे और सहायता की जरूरत वाले विद्यार्थियों को नामित स्कूल कर्मचारियों तक पहुंचने में मदद करेंगे।

तीसरे स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के काउंसलर और मनोविज्ञान में योग्यता रखने वाले नामित शिक्षक अपनी पेशेवर क्षमताओं के दायरे में काउंसलिंग, स्क्रीनिंग, मूल्यांकन और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

चौथे स्तर पर विशेष मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की जरूरत वाले विद्यार्थियों को नामित AFLC क्लीनिकों में भेजा जाएगा, जहां क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट उनकी जरूरतों का आकलन कर उचित सहायता उपलब्ध करवाएंगे।

पांचवें स्तर पर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन या उपचार की आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को मनोचिकित्सकों से जांच करवाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में भेजा जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार और नियमित फॉलोअप किया जाएगा।

यह रेफरल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है कि जिन विद्यार्थियों को पेशेवर मदद की जरूरत है, उन्हें केवल स्कूल स्तर की सहायता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि निरंतर और विशेषज्ञ देखभाल भी उपलब्ध करवाई जाए।

122 काउंसलर और 400 शिक्षक संभालेंगे नेटवर्क

उन्होंने बताया कि पूरे हरियाणा में ‘साथ’ (SAATH) प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 122 काउंसलरों को प्रशिक्षित किया है। ये काउंसलर इस पहल के तहत चिन्हित 200 सरकारी स्कूलों में से प्रत्येक स्कूल के दो नामित शिक्षकों के साथ समन्वय करेंगे। इससे लगभग 400 प्रशिक्षित शिक्षकों का एक नेटवर्क तैयार होगा।

स्कूल शिक्षा विभाग प्रत्येक स्कूल में दो शिक्षकों की पहचान करने, उन्हें प्रशिक्षण दिलाने और स्कूल के माहौल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता तथा शुरुआती पहचान की व्यवस्था को शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सभी नामित शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, मनोवैज्ञानिक तनाव के शुरुआती लक्षणों की पहचान, सहयोगात्मक संवाद और उचित रेफरल व्यवस्था के बारे में व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस संयुक्त प्रयास के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर सभी 200 चिन्हित सरकारी स्कूलों के नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों तक पहुंचना है। यह पहल संवेदनशील विद्यार्थियों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने, समय पर पेशेवर सहायता उपलब्ध करवाने और मानसिक रूप से स्वस्थ एवं मजबूत पीढ़ी को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी।

शिक्षकों को दिया जाएगा व्यवस्थित प्रशिक्षण

डॉ. मिश्रा ने बताया कि स्कूल कर्मचारियों का प्रशिक्षण इस परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मानसिक स्वास्थ्य विभाग शिक्षकों और काउंसलरों के लिए मानकीकृत और आयु के अनुकूल वीडियो प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगा। इन्हें ECHO प्लेटफॉर्म और यूट्यूब सहित आधिकारिक डिजिटल चैनलों के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा।

लेवल-1 प्रशिक्षण छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को कवर करेगा। इसमें बच्चों के बुनियादी मानसिक स्वास्थ्य, विकासात्मक बदलावों, भावनात्मक परेशानियों, शुरुआती चेतावनी संकेतों, सहयोगात्मक संवाद और रेफरल प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को संभालने वाले शिक्षकों के लिए निर्धारित लेवल-2 प्रशिक्षण में किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा का तनाव, साथियों का दबाव, नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम, जटिल व्यवहार संबंधी चिंताएं और उचित रेफरल प्रक्रियाएं शामिल होंगी। इसमें बुनियादी प्रशिक्षण की पुनरावृत्ति भी की जाएगी।

प्रशिक्षण मॉड्यूल में गोपनीयता, बाल सुरक्षा और संवेदनशील संवाद पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मनोवैज्ञानिक परेशानियों का सामना कर रहे विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े।

हरियाणा के मानसिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ब्रह्मदीप ने कहा कि शुरुआती पहचान और समय पर सहायता से बच्चों की मनोवैज्ञानिक परेशानियों को गंभीर मानसिक स्थितियों में बदलने से रोका जा सकता है।

‘साथ’ प्रोजेक्ट के माध्यम से भावनात्मक रूप से मजबूत विद्यार्थी तैयार करना, एक सहयोगात्मक स्कूल वातावरण विकसित करना और यह सुनिश्चित करना उद्देश्य है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा कोई भी बच्चा बिना पहचान और पेशेवर सहायता के न रहे।

प्रस्तावित ‘साथ’ प्रोजेक्ट के माध्यम से हरियाणा एक एकीकृत और टिकाऊ स्कूल मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें रोकथाम संबंधी जागरूकता, शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, पेशेवर मूल्यांकन और विशेषज्ञ उपचार को एक साथ जोड़ा जाएगा।

यह पहल राज्य सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता को स्कूल के माहौल का अभिन्न अंग बनाया जाए और प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित एवं सहयोगात्मक देखभाल उपलब्ध करवाई जाए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments