संगरूर, 2 जुलाई, 2026 : पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत केवीके, संगरूर में ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों एवं प्रगतिशील किसानों के लिए एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया।
डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पीएयू–केवीके, संगरूर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गांवों के जन-प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. मनदीप सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों तथा वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन में इसकी महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें तथा दीर्घकाल तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक और जैविक उर्वरकों का संतुलित एवं समन्वित उपयोग अपनाएं।
सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह ने मिट्टी एवं सिंचाई जल की जांच के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मिट्टी और सिंचाई के पानी के नमूने वैज्ञानिक तरीके से लेने की प्रक्रिया समझाई तथा किसानों को धान की फसल में फॉस्फोरस उर्वरकों का प्रयोग केवल मिट्टी परीक्षण की सिफारिशों के अनुसार करने की सलाह दी, ताकि उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना खेती की लागत कम की जा सके।
सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) डॉ. सुनील कुमार ने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए फसल अवशेषों का खेत में ही वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने पर जोर दिया। वहीं केवीके की विशेषज्ञ डॉ. रविंदर कौर ने बागवानी फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन तथा घरेलू स्तर पर पोषण वाटिका (किचन गार्डन) स्थापित करने संबंधी व्यावहारिक जानकारी दी।
सम्मेलन में गांव तुंगा के सरपंच सरदार धर्मपाल सिंह, कुलार खुर्द के सरपंच सरदार हरिंदर सिंह, कनोई के सरपंच सरदार दीप सिंह तथा खेड़ी के सरपंच सरदार धनवंत सिंह ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त पंच सरदार सुरजीत सिंह, सरदार पाला सिंह, सरदार अमरदीप सिंह और सरदार सतिगुर सिंह के साथ-साथ आसपास के गांवों के प्रगतिशील एवं युवा किसान सरदार बेअंत सिंह, सरदार केवल सिंह, सरदार प्रीतइंदर सिंह तथा सरदार बलविंदर सिंह भी सम्मेलन में शामिल हुए।
सम्मेलन में उपस्थित प्रतिभागियों ने कृषि विज्ञान केंद्र की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कृषि एवं सब्जी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में विभिन्न गांवों में भी ऐसे जागरूकता शिविर आयोजित करने का अनुरोध किया।