कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने घग्गर नदी पर बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों का लिया जायजा; दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज‘ पर प्रतिबंध और रवनीत बिट्टू के बयानों पर जताई कड़ी आपत्ति
राजनीतिक नेताओं से पंजाब की शांति और सौहार्द बिगाड़ने वाले बयान देने से बचने की अपील, हिंदू-सिख एकता हमेशा अटूट रही है और रहेगी
मूनक/संगरूर, 11 जुलाई, 2026 : पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज घग्गर नदी के संवेदनशील (क्रिटिकल) स्थलों का दौरा कर बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। मकरौड़ साहिब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने जहां बाढ़ से बचाव के सभी इंतजामों को संतोषजनक बताया, वहीं अभिनेता एवं गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज‘ पर लगाए गए प्रतिबंध तथा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ के तुरंत बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने स्थायी बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए थे। घग्गर नदी के सबसे संवेदनशील स्थल मकरौड़ साहिब, जहां नदी की चौड़ाई 598 फुट से घटकर अचानक 198 फुट रह जाती है, पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि मकरौड़ साहिब से कड़ैल तक 18 किलोमीटर क्षेत्र में दोनों किनारों के बांधों को दो-दो फुट ऊंचा किया गया है। संभावित रिसाव या दरार की स्थिति से निपटने के लिए मौके पर हजारों रेत से भरे बैग तैयार रखे गए हैं। इसके अलावा मकरौड़ साहिब से खनौरी तक 22 किलोमीटर क्षेत्र में जहां-जहां आवश्यकता थी, वहां पत्थर बिछाने (स्टोन पिचिंग) का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
गोयल ने कहा कि पिछले वर्ष इतिहास में सबसे अधिक जलस्तर होने के बावजूद सरकार की सतर्कता और लोगों के सहयोग से 12 दिनों तक पानी एक ही स्तर पर रहने के बाद भी कहीं कोई बांध नहीं टूटा। इस बार भी विभाग के अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद हैं, इसलिए लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज‘ पर प्रतिबंध के संबंध में उन्होंने कहा कि फिल्म पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उनके मन में किसी न किसी प्रकार का डर अवश्य है।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा दिलजीत दोसांझ पर की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि यदि दिलजीत में कोई कमी थी तो कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन्हें क्यों बुलाया और उनसे मुलाकात क्यों की। उन्होंने कहा कि रवनीत बिट्टू को पंजाब के लोगों की आवाज बनकर केंद्र के समक्ष राज्य के हितों की बात रखनी चाहिए, न कि पंजाब के कलाकारों के खिलाफ अनावश्यक बयानबाजी करनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें साझा कर एक समुदाय को उकसाने संबंधी बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए गोयल ने कहा कि पंजाब पहले ही आतंकवाद का कठिन दौर झेल चुका है, जिसमें हजारों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे बयान देकर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास न करें।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दौर में विदेशी ताकतों ने धार्मिक स्थलों पर बेअदबी की घटनाएं कराकर हिंदू-सिखों में फूट डालने की कोशिश की थी, लेकिन पंजाब के लोगों ने अपनी एकता को टूटने नहीं दिया। जब किसी गांव का कोई हिंदू परिवार पलायन करने लगता था तो सिख भाई उनके घरों के सामने लेट जाते थे और उन्हें जाने नहीं देते थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में हिंदू और सिख पहले भी एक थे, आज भी एक हैं और हमेशा एक रहेंगे।
अंत में उन्होंने अपनी मिसाल देते हुए कहा कि वह स्वयं हिंदू समुदाय से हैं, जबकि उनके विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में उनके समुदाय का एक भी घर नहीं है, फिर भी सिख समाज ने उन्हें भरपूर समर्थन देकर विजयी बनाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीति को सांप्रदायिक रंग देने से हर हाल में बचना चाहिए।