24 जुलाई, 2026 (प्रभजोत सिंह): कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय उनके साथ कठोर रवैया अपना रही है।
एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित अपने लेख ‘शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा’ में सोनिया गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साहस का जवाब सरकार ने “कायरता और अनावश्यक कठोरता” से दिया है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रही है, जैसे वे विरोधी हों। उनका कहना था कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं में उम्मीद के बजाय निराशा पैदा कर रही है और सरकार इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाने से बच रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना हर सरकार की नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की खामियों और सरकार की जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति का परिणाम है।
सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ सख्ती की गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (-एन.आर.सी) के विरोध के दौरान विश्वविद्यालय परिसरों में हुई पुलिस कार्रवाई और महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान हुई घटनाएं आज भी लोगों के जेहन में हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की।






