संगरूर, 10 अगस्त 2026 (जगदेव सिंह जग्गी): सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग, पंजाब द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला संगरूर के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में डी-वर्मिंग दिवस के संबंध में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। ये गतिविधियां जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रदीप सिंह गिल के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित की गईं।
इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों और उनके माता-पिता को पेट के कीड़ों के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़े बच्चों की भूख, पोषण, शारीरिक विकास और समग्र स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए बच्चों के स्वस्थ पालन-पोषण के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सुथरे वातावरण को सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है।
जागरूकता के दौरान बच्चों को खाना खाने से पहले और शौचालय का उपयोग करने के बाद साबुन से हाथ धोने, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करने, फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाने तथा आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा बच्चों को नंगे पैर न चलने और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के संबंध में भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर पात्र बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार पेट के कीड़ों से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की डी-वर्मिंग दवा दी गई। दवा की खुराक बच्चों की उम्र और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार दी गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रदीप सिंह गिल ने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ समाज की नींव हैं। बच्चों को पेट के कीड़ों और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण संबंधी जागरूकता पैदा करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माता-पिता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाया जा सकता है।
उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचकर डी-वर्मिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, स्वच्छ पानी और पौष्टिक आहार के संबंध में लगातार जागरूकता पैदा करें।
विभाग द्वारा माता-पिता और आम लोगों से अपील की गई कि बच्चों के स्वस्थ और सर्वांगीण विकास के लिए स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य देखभाल को दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए तथा डी-वर्मिंग के संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए।






