Thursday, August 27, 2026
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के.वी.के., संगरूर ने मशरूम की खेती और प्रोसेसिंग पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण करवाया

संगरूर, 10 अगस्त,2026 (अनिल कुमार भारती): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (के.वी.के.), संगरूर द्वारा निदेशक प्रसार शिक्षा, पी.ए.यू., लुधियाना के मार्गदर्शन में “मशरूम की खेती और प्रोसेसिंग” विषय पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिला संगरूर के विभिन्न गांवों से 35 किसानों और किसान महिलाओं ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के पहले दिन डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, के.वी.के., संगरूर ने प्रशिक्षार्थियों का स्वागत करते हुए मशरूम की खेती के आर्थिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती को कृषि के सहायक व्यवसाय के रूप में अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बेरोजगार युवाओं तथा किसानों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

डॉ. रविंदर कौर, एसोसिएट प्रोफेसर (बागवानी) ने सालभर उगाई जाने वाली मशरूम की विभिन्न किस्मों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कंपोस्ट तैयार करने, बुवाई, केसिंग और फसल की देखभाल के वैज्ञानिक तरीकों को विस्तार से समझाया।

डॉ. वितासता, सहायक प्रोफेसर, गृह विज्ञान ने मशरूम को पौष्टिक भोजन बताते हुए कहा कि यह प्रोटीन, फाइबर, बी-विटामिन, शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-डी का प्राकृतिक स्रोत हैं। उन्होंने मशरूम से बनाए जाने वाले विभिन्न व्यंजनों की विधियां भी साझा कीं।

डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर, फसल विज्ञान ने गुणवत्तापूर्ण कंपोस्ट तैयार करने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें अपनाकर मशरूम की पैदावार और गुणवत्ता में वृद्धि की जा सकती है।

इस व्यवसाय में सरकारी सब्सिडी और वित्तीय सुविधाओं के बारे में डॉ. हरदीप सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, बागवानी, संगरूर और श्री सुरमुख सिंह, लीड बैंक मैनेजर, संगरूर ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर प्रगतिशील मशरूम उत्पादक श्री जसपाल सिंह ने अपने अनुभव प्रशिक्षार्थियों के साथ साझा किए।

कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा), संगरूर के सहयोग से पी.ए.यू., लुधियाना के एक्सपोजर दौरे के दौरान डॉ. शिवानी, माइकोलॉजिस्ट और डॉ. जगबीर कौर राहिल, फूड टेक्नोलॉजिस्ट ने स्पॉन की तैयारी, कंपोस्ट बनाने और मशरूम की प्रोसेसिंग की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों और प्रोसेसिंग के माध्यम से किसान मशरूम से अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।

प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों ने गांव बडरूखां के प्रगतिशील मशरूम उत्पादक के “मडाहर मशरूम फार्म” का दौरा भी किया।

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