हरियाणा, 25 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में उन सभी पुराने वाटर वर्क्स को आरसीसी (सीमेंट-कंक्रीट) आधारित बनाया जाएगा, जहां भूजल के साथ मिश्रण के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा जहां संभव हो, ट्यूबवेल आधारित वाटर वर्क्स को प्राथमिकता के आधार पर नहरी पानी आधारित बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में जलघरों और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए। बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा भी मौजूद रहे।
विभाग के प्रमुख सचिव पंकज यादव ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,888 नहर आधारित वाटर वर्क्स और 4,199 बूस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। इसके अलावा 12,404 ट्यूबवेल और 5 रेन वाटर वेल योजनाएं भी पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 103 नए नहर आधारित वाटर वर्क्स, 1,065 नए ट्यूबवेल, 369 नए बूस्टिंग स्टेशन और 2 नए रेन वाटर वेल स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, 7,005 किलोमीटर लंबे वितरण नेटवर्क में से 1,525 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जाएगी। इसमें से मार्च 2027 तक 837 किलोमीटर नेटवर्क बदलने का लक्ष्य है।
विभाग के अनुसार, ईंटों से बने 466 वाटर वर्क्स को आरसीसी आधारित वाटर वर्क्स में बदला जा रहा है। इस कार्य पर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भूजल के कारण पानी में TDS, हार्डनेस और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है, वहां वाटर वर्क्स को आरसीसी आधारित बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आने वाले वर्षों में भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा। उन्होंने नए वाटर वर्क्स की क्षमता बढ़ती आबादी के अनुरूप निर्धारित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अरुण कुमार गुप्ता, उप-प्रधान सचिव यशपाल यादव, इंजीनियर-इन-चीफ देवेंद्र दहिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






