Wednesday, August 26, 2026
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कुरुक्षेत्र में स्किन बैंक स्थापित करने की मांग को लेकर सांसद नवीन जिंदल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखा पत्र

कुरुक्षेत्र 25 अगस्त ,2026 (संजीव शर्मा): सांसद नवीन जिंदल ने आग से झुलसे पीड़ित लोगों के इलाज  हेतु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की आवाज बुलंद की है। सांसद जिंदल की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र भेजकर आग से जले पीड़ितों के इलाज के लिए स्किन बैंक स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार को आश्वस्त किया है कि यदि कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में स्किन बैंक स्थापित करने पर सरकार विचार करती है तो वे इसके लिए पूरी तरह से मदद करने को तैयार हैं। इतना ही नहीं सांसद नवीन जिंदल की फाउंडेशन स्किन डोनेशन के लिए लोगों के बीच जाकर जागरुकता अभियान चलाने को भी पूरी तरह से तैयार है।
सांसद नवीन जिंदल ने पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि देशभर में 1.4 बिलियन लोगों की आबादी के लिए सिर्फ 16 स्किन बैंक हैं। जिनमें से 7 महाराष्ट्र में ही केंद्रित हैं। अन्य राज्यों में आग से जले पीड़ितों के इलाज के लिए ऐसी कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं है। सांसद ने कहा कि जिस तरह से अंगदान और नेत्रदान को लेकर जागरूकता आई है। उसके विपरीत त्वचा दान को लेकर देश में लोग इतने अधिक सचेत नहीं हैं। जबकि मृत्यु के बाद व्यक्ति की त्वचा किसी दूसरे पीड़ित मरीज के काम आ सकती है। इससे डोनेट करने वाले का मृत शरीर भी खराब नहीं होता।
सांसद नवीन जिंदल की ओर से भेजे गए पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से सिफारिश की गई है कि देश भर के बड़े सरकारी मेडिकल इंस्टीट्यूशन में स्किन बैंक का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाए। साथ ही स्किन डोनेशन प्रोटोकॉल को मौजूदा ऑर्गन और टिशू डोनेशन फ्रेमवर्क में इंटीग्रेट करने की दिशा में काम किया जाए। लोगों में स्किन डोनेशन के प्रति जागरुकता लाने के लिए लिए विशेष पब्लिक कैंपेन शुरू किए जाएं।  डोनेट करके संरक्षित की गई स्किन के स्टोरेज और एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर के लिए एक सेंट्रलाइज्ड कोऑर्डिनेटेड नेशनल नेटवर्क स्थापित किया जाए।
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पीड़ित की जान बचा सकता है हमारा एक प्रयास:सांसद नवीन जिंदल
संबंधित विषय को लेकर  सांसद नवीन जिंदल का कहना है कि स्किन डोनेशन गंभीर रूप से जले हुए विक्टिम का जीवन बचाने के लिए वरदान साबित हो सकता है। अवेयरनेस और स्किन डोनेशन एवं संरक्षण को लेकर अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण बहुत सी ऐसी जानें चली जाती हैं। जिन्हें बचाया जा सकता था। देश के हर क्षेत्र में इस इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना एक स्टैंडर्ड हेल्थ केयर प्राथमिकता होनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस दिशा में तेजी से और अहम कदम उठाते हुए मेरे द्वारा भेजे गए पत्र पर शीघ्र विचार करेगा ।

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