लुधियाना 11 सितंबर 2026, (छत्रपाल सिंह): गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना 18 और 19सितंबर, 2026 को दो दिवसीय ‘पशु पालन मेला’ आयोजित करेगी।डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस चांसलर ने बताया कि हम मेले में अन्य राज्यों के किसानों को भी आमंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार का मेला जैविक सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) के प्रति जागरूकता को समर्पित होगा। इसी उद्देश्य से मेले का नारा रखा गया है— “मजबूत जैविक सुरक्षा, करे बीमारियों से रक्षा।”पशुपालकों को जैविक सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं संबंधी जानकारी प्रदान की जाएगी तथा पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों के बारे में अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक ढंग से पशुपालन अपनाने और उसे प्रोत्साहित करने वाले किसानों को तीन श्रेणियों में ‘मुख्यमंत्री पुरस्कार’से भी सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल, निदेशक प्रसार शिक्षा ने कहा कि किसानों द्वारा की गई पूछताछ से पता चलता है कि वे मेले में आने के लिए बेहद उत्सुक हैं। विश्वविद्यालय मेले में, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन करेगा और वैज्ञानिक तकनीकी व्याख्यानों के लिए मंच पर एकत्रित होंगे। एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ नस्लों के गाय, भैंस, बकरी, मछली और मुर्गियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित संपूर्ण साहित्य और पत्रिका ‘वैज्ञानिक पशु पालन’ भी उपलब्ध रहेगी। कई पुस्तिकाओं और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया जाएगा।
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रेरित करने के अलावा मेले में दूध व दूध से बने उत्पाद, मशीनरी, दवाइयां, टीके, पशु आहार से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि और वित्तीय संस्थाएं भी मौजूद रहेंगी। मेले में विश्वविद्यालय द्वारा धातु चूरा, पशु वसा, बाईपास वसा, भूसे को यूरिया से उपचारित करने की जानकारी दी जाएगी। किसानों को थनों में सूजन, दूध की जांच, पशु विषाक्तता, आंतरिक परजीवियों के बारे में जागरूक किया जाएगा। मेले के दौरान पशुओं के रक्त, गोबर, मूत्र, त्वचा, चारे के नमूने, दूध व चारे की विषाक्तता की नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मेले में जहां पशुपालन व कृषि से जुड़े विभिन्न विभाग भाग लेंगे, वहीं 100 से अधिक कंपनियां अपनी दवाइयां, उपकरण, मशीनरी व पशु संबंधी सुविधाओं के बारे में स्टॉल लगाएंगी। विश्वविद्यालय के नेतृत्व में काम कर रहे किसान संगठन भी अपने स्टॉल लगाएंगे।






