चंडीगढ़, 16 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की मौजूदगी में आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने किशाऊ प्रोजेक्ट समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी उपस्थित थे।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक समझौते के साक्षी बने हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हुए समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी न किसी रूप में लाभार्थी बनेंगे। श्री शाह ने कहा कि इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि छह राज्यों ने अपनी सहमति दी और समझौते पर हस्ताक्षर किए। गृह मंत्री ने प्रोजेक्ट को इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और यमुना बेसिन के ये छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब से श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं, आज यह दसवां जल विवाद खत्म होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में पिछले पचास वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अगस्त 2018 में लखवाड़ बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट का विवाद समाप्त हुआ। उसी महीने शाहपुर कंडी बांध प्रोजेक्ट का विवाद सुलझा। साल 2019 में ऊपरी यमुना बेसिन की रेणुका जी बहुउद्देशीय बांध प्रोजेक्ट का विवाद खत्म हुआ। साल 2021 में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ, जिससे बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र को लाभ मिला। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक योजना साल 2024 में आगे बढ़ी। हथनीकुंड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से यमुना तक पानी स्थानांतरित करने की योजना फरवरी 2024 में मंजूर हुई। नर्मदा प्रोजेक्ट से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का विवाद जुलाई 2026 में पूरा हुआ। सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे का विवाद अगस्त 2026 में सुलझा, और आज अंततः किशाऊ बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट पर सहमति बनी।
श्री अमित शाह ने कहा कि 2018 से 2026 तक का समय मोदी जी के नेतृत्व में कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक लगभग सभी जल विवादों को समाप्त करने के समय के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषद की बैठकों में इनकी नींव रखी गई और इन समझौतों को जल शक्ति मंत्रालय ने कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि श्री सी. आर. पाटिल ने जल शक्ति मंत्री बनने के बाद लंबे समय से लंबित विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। उन्होंने हर स्तर पर पहल की और जहां जिसकी मदद की जरूरत पड़ी, चाहे अंतर-राज्यीय परिषद को सक्रिय करना हो, चाहे गृह मंत्रालय को साथ लेना हो, इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ प्रोजेक्ट की बात करें तो 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ था कि बेसिन में आने वाले हर स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएंगे। यदि वह व्यवस्था न होती, तो यह संभव नहीं था। फिर 2019 में लखवाड़ और रेणुकाजी प्रोजेक्ट्स के विवाद समाप्त होने के बाद किशाऊ का काम आगे बढ़ा। पिछले 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी। जल शक्ति मंत्रालय ने इसे आगे बढ़ाया और सभी राज्यों की सहमति के बाद, तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर विचार करते हुए तथा सभी राज्यों के हितों की चिंता करते हुए, इसे समाधान तक पहुंचाया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने किशाऊ प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार की कुछ समस्याएं थीं। भारत सरकार की ओर से हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को भारत सरकार की योजनाओं के तहत शामिल करने का प्रयास किया जाएगा और आगे उत्तराखंड पर आने वाले वित्तीय भार को वहन करने में भी हम उनकी मदद करेंगे।
श्री अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनेगा, जहां 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जल-विद्युत भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि जब यमुना के पानी का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्माताओं से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह (environmental flow) की गणना ही नहीं की गई और जितना पानी उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बांट दिया गया। नदी के लिए पानी छोड़ा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि किशाऊ प्रोजेक्ट समझौते से जो 25 प्रतिशत पानी आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए बहुत लाभदायक साबित होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि जब से श्रीमती रेखा गुप्ता जी दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं, मोदी जी के नेतृत्व में यमुना की सफाई के लिए लगातार काम हो रहा है। यमुना जब साफ होती है, तो गंगा भी साफ होती है; क्योंकि अंततः यमुना प्रयागराज में गंगा में ही समाहित हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक यमुना की सफाई का सपना पूरा नहीं होता, गंगा की सफाई का सपना भी अधूरा रहेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री और सभी संबंधित लोग पूरे सहयोग और लगन के साथ यमुना को साफ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की सफलता मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” तथा टीम इंडिया के मूल मंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भारत की उस परिकल्पना को भी दर्शाती है, जिसमें सभी मिलकर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्षों ने जिस तरह इस समझौते में एक मन से और एक दिशा में काम किया है, उसी तरह इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में भी सभी राज्य एक दिशा में काम करेंगे। इससे हम यमुना को जल्द साफ कर सकेंगे और करोड़ों लोगों को पीने का पानी, खेती का पानी, विकास और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।






