चंडीगढ़, 18 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले हरियाणा में पराली जलाने पर प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कई जिलों में एसडीएम और अन्य अधिकारियों द्वारा किसानों को चेतावनी दी गई है कि खेतों में फसल अवशेषों को आग लगाने की सूरत में एफआईआर, पर्यावरणीय मुआवजा और ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री (लाल प्रविष्टि) की जाएगी।
कुरुक्षेत्र प्रशासन के मुताबिक 2 एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर ₹5,000, 2 से 5 एकड़ पर ₹10,000 और 5 एकड़ से अधिक पर ₹15,000 तक जुर्माना लगाया जाएगा। दोषी किसान की पोर्टल पर रेड एंट्री के साथ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन ने आगे बताया है कि ऐसे किसान पर सरकारी कृषि योजनाओं के लाभों से वंचित करने वाली पोर्टल-पाबंदी भी लग सकती है।
करनाल जिले में भी 7 सदस्यीय जिला स्तरीय पराली सुरक्षा टीम बनाई गई है। इसके अलावा तहसील और गांव स्तर पर विशेष टीमें बनाकर खेतों की निगरानी की जा रही है। प्रशासन के अनुसार आग की घटना मिलने पर जुर्माने के साथ एफआईआर और रेड एंट्री की कार्रवाई होगी, जबकि लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
इस बार निगरानी के लिए सैटेलाइट डेटा के साथ ड्रोन और जमीनी टीमों के इस्तेमाल को भी मजबूत किया जा रहा है। सीएक्यूएम (CAQM) ने 2026 के सीजन के लिए पराली जलाने की घटनाओं को समाप्त करने के लिए इन-सिटू (खेत के भीतर) और एक्स-सिटू (खेत से बाहर) प्रबंधन, मशीनरी की उपलब्धता और सख्त प्रवर्तन पर जोर दिया है।
जुर्माने का केंद्रीय प्रबंध: सीएक्यूएम के 2024 में संशोधित नियमों के अनुसार एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने पर ₹5,000, ₹10,000 और ₹30,000 पर्यावरणीय मुआवजे की श्रेणियां लागू हैं—जमीन के क्षेत्रफल के अनुसार।
प्रशासन किसानों को पराली जलाने के बजाय सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, बेलर, श्रेडर और अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का उपयोग करने की सलाह दे रहा है। सरकार द्वारा ऐसी मशीनरी पर सब्सिडी और पराली के वैकल्पिक उपयोग के लिए प्रबंध भी किए जा रहे हैं।
यह कार्रवाई सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगी; पराली जलाने की पुष्टि होने पर कानूनी केस, पर्यावरणीय मुआवजा और रेड एंट्री जैसी कई कार्रवाइयां एक साथ हो सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि मकसद किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए वायु प्रदूषण और मिट्टी के नुकसान को रोकना है।






