Sunday, October 11, 2026
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भाषा विभाग पंजाब ने ‘पंजाब से बाहर’ कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत देहरादून में कराया आयोजन

पटियाला, 3 अक्टूबर, 2026 (हर्षलीन सिंह): भाषा विभाग पंजाब द्वारा ‘पंजाब से बाहर’ कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत डॉ. बलवीर सिंह साहित्य सदन (पंजाबी यूनिवर्सिटी कैंपस), देहरादून में भाई वीर सिंह को समर्पित कवि दरबार आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता शिरोमणि कवि दर्शन बुट्टर, साहित्य गौरव प्रेम साहिल देहरादून तथा प्रो. सुदर्शन गासो अंबाला ने की। विभिन्न राज्यों से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कवि दरबार को बहुआयामी बना दिया। इस अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जगदीप सिंह तथा श्री साहिब के चेयरमैन सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कवि दरबार की शुरुआत शायर डॉ. संदीप शर्मा लुधियाना ने भावपूर्ण कविता ‘पिता’ से की। इसके बाद अवतारजीत सिंह पटियाला ने ‘हम जो भी लिखते हैं, फर्ज जरूरी के लिए..’ गीत को तरन्नुम में गाकर लेखकों को अपने फर्ज पहचानने का संदेश दिया।

बलविंदर संधू पटियाला ने ‘दसवंध’, ‘दिलगीरी’ और ‘अग्न या जल’ कविताओं के माध्यम से विभिन्न विषयों को छुआ। मनजीत पुरी फरीदकोट ने ‘हमारे समय में..’ गजल के जरिए मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्य किया। तरसेम बरनाला ने ‘दुख के दास’ के माध्यम से तकनीकी खोजों के कारण बदलते समाज की त्रासदी को बयान किया।

गुरचरण सिंह जोगी अंबाला ने ‘कोई तो बात करे..’ कविता के जरिए साझा पंजाब की बात रखी। सरदार जसवंत सिंह जफर ने चालीस मुक्तों से संबंधित कविता ‘आत्मा’ तथा ‘भाई कनैया’ के माध्यम से बलिदान, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।

डॉ. अजीतपाल जटाणा मोगा ने गजल ‘गीत फूट पड़ेंगे…’ को तरन्नुम में प्रस्तुत कर माहौल को नई रंगत दी। प्रो. राजेश मोहन फरीदकोट ने ‘आंखों में देखा मैंने..’ गजल और टप्पे तरन्नुम में गाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। गुरप्रीत मानसा ने अपनी कविता ‘मां का जाना’ के माध्यम से माहौल को करुणामय बना दिया।

राजेश आनंद आसीर देहरादून ने ‘करार’ और ‘इश्क की रहबरी’ गजलों के माध्यम से कवि दरबार को प्रेमपूर्ण रंग दिया। प्रो. गुरप्रीत कौर अंबाला ने ‘बोलने का फायदा क्या है..’ और ‘महानगर’ कविताओं के जरिए शहरीकरण पर व्यंग्य किया।

अंबर खरबंदा ने ‘जिस वक्त खुल जाती है आंख..’ गजल से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। संतोष सुखी ने ‘सोहणी’ कविता के माध्यम से सौंदर्य के विभिन्न रूपों का वर्णन किया। दीपक अरोड़ा ने ‘बापू’ कविता के जरिए पिता की अहमियत को उजागर किया। कुमार जगदेव बराड़ ने ‘बुल्लिया’ के माध्यम से अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

प्रेम साहिल देहरादून ने ‘उठ खोल दरवाजा, मोहब्बत आई द्वार पर..’ गजल के जरिए प्रेम का संदेश दिया। प्रो. सुदर्शन गासो ने ‘राजा वह होता है..’ नज्म के माध्यम से श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। दर्शन बुट्टर नाभा ने अपनी कविताओं ‘पंजाब, पंजाबी और मां’ तथा ‘संवाद’ के माध्यम से समागम को शिखर पर पहुंचा दिया।

मंच संचालन डॉ. मनजिंदर सिंह ने बखूबी किया। डॉ. बलवीर सिंह साहित्य सदन देहरादून के सहयोग से आयोजित इस कवि दरबार के अंत में भाषा विभाग की ओर से सभी कवियों को विभागीय शॉल देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर सहायक निदेशक अमरिंदर सिंह, शोध अधिकारी हरप्रीत सिंह, साहित्य केंद्र के प्रभारी डॉ. कुलविंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और श्रोता उपस्थित रहे।

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