नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के प्रस्ताव पर 14 राज्यों की सहमति को सकारात्मक कदम बताया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने उम्मीद जताई कि शेष राज्य भी जल्द इस व्यवस्था को लागू करने पर सहमत होंगे। हालांकि, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके या हाल ही में सेवानिवृत्त हुए न्यायिक अधिकारियों की ओर से दायर अलग-अलग अर्जियों पर तत्काल सुनवाई करने से पीठ ने इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के प्रभावी अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है और इसमें शीर्ष अदालत तथा राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता है। अदालत का रुख स्पष्ट करता है कि फिलहाल इस मुद्दे पर व्यक्तिगत राहत की अर्जियों के बजाय राज्यों के स्तर पर निर्णय लागू कराने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।
4 सितंबर को राज्यों को दिए गए थे निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को राज्यों को जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 31 मार्च के बाद सेवानिवृत्त हुए न्यायिक अधिकारियों को संबंधित हाई कोर्ट द्वारा पात्रता की जांच किए जाने के बाद दोबारा सेवा में शामिल होने का विकल्प दिया जाए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन न्यायिक अधिकारियों को राहत देने से भी जुड़ा है, जो सेवानिवृत्ति आयु में प्रस्तावित बदलाव के कारण सेवा से बाहर हो चुके हैं। हालांकि, दोबारा सेवा में शामिल होना स्वतः लागू होने वाला अधिकार नहीं होगा; इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट की पात्रता जांच आवश्यक होगी।
राज्यों को वित्तीय बोझ का तर्क देने से किया था आगाह
सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि राज्य सरकारें वित्तीय बोझ का हवाला देकर सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध नहीं कर सकतीं। अदालत ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी सहित अन्य संबंधित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से भी इस विषय पर पुनर्विचार करने को कहा था।
न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु में अंतर
वर्तमान व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष और हाई कोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु को 62 वर्ष करने की मांग इसी व्यापक न्यायिक सेवा संबंधी विवाद का हिस्सा है।
इस मामले में अंतिम स्तर पर सभी संबंधित राज्यों की स्थिति और निर्देशों के क्रियान्वयन की अहम भूमिका होगी। 14 राज्यों की सहमति को प्रगति के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू होने के लिए शेष राज्यों की प्रतिक्रिया और आवश्यक प्रशासनिक कदम भी महत्वपूर्ण होंगे।






