नई दिल्ली, 27 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भारतीय चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने अपने हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सहमति का उल्लेख किया है। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को लिए गए फैसलों सहित एस.आई.आर. से संबंधित सभी निर्णयों पर तीनों आयुक्त सहमत थे।
आयोग का यह जवाब उस याचिका के संदर्भ में दाखिल किया गया है, जिसमें एस.आई.आर. से जुड़े निर्णयों को लेकर उठाए गए सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए थे। याचिका एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर से संबंधित 14 महत्वपूर्ण फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में इन दावों से असहमति जताते हुए कहा कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अधिकार का हवाला
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संबंधित नियमों के तहत उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। आयोग ने याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को आधारहीन बताते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया है।
एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सत्यापित करना है। इस प्रक्रिया को लेकर विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि मतदाताओं की पात्रता की पुष्टि के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और पुराने मतदाता रिकॉर्ड से विवरण नहीं मिलने की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुराने रिकॉर्ड से विवरण जुड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत नहीं
हलफनामे के अनुसार, आयोग ने पुराने मतदाता रिकॉर्ड के साथ आवेदकों का विवरण जोड़ने में सहायता के लिए एक अलग घोषणा-पत्र तैयार किया है। आयोग का कहना है कि यह घोषणा-पत्र मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए निर्धारित फॉर्म-6 का हिस्सा नहीं है, बल्कि पुराने रिकॉर्ड में आवेदक या उसके रिश्तेदारों का विवरण खोजने और पात्रता की पुष्टि करने में मदद के लिए बनाया गया है।
आयोग के मुताबिक, जिन आवेदकों का विवरण पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा, वे घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 जमा कर सकेंगे और उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जिनका विवरण पुराने रिकॉर्ड से नहीं मिल पाएगा या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां होंगी, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
बूथ स्तर के अधिकारी घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज
चुनाव आयोग ने दस्तावेज जमा करने में मतदाताओं को होने वाली परेशानी कम करने के लिए कहा है कि बूथ स्तर के अधिकारी जरूरत पड़ने पर मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद इन दस्तावेजों को मतदाता पंजीकरण अधिकारियों के विचार और जांच के लिए अपलोड किया जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा कि एस.आई.आर. की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पात्र नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का रास्ता खुला रहेगा। मतदाता सूचियों को निर्धारित नियमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
अपने पक्ष में चुनाव आयोग ने 27 मई 2026 के एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारतीय चुनाव आयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। आयोग के अनुसार, इस फैसले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दस्तावेजों से संबंधित व्यवस्था तय करने के उसके अधिकार को मान्यता दी गई थी।
इससे पहले 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह चुनाव आयोग के फैसलों की जांच करेगी और यदि कोई निर्णय कानून के विपरीत पाया जाता है, तो उसे निरस्त किया जा सकता है। अब एस.आई.आर. से जुड़े विवाद में आयोग का हलफनामा उसका आधिकारिक पक्ष सामने रखता है। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के विचार और आदेशों से तय होगी।






