Wednesday, November 4, 2026
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थापर इंस्टीट्यूट के 70 साल पूरे: पंजाब के राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह 2026 के दौरान 3,359 विद्यार्थियों को प्रदान की डिग्रियां

पटियाला, 2 नवंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला ने आज अपने तीन दिवसीय दीक्षांत समारोह 2026 की शुरुआत की। इस वर्ष संस्थान अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रहा है। इस समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। 2 से 4 नवंबर तक चलने वाले इस दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 3,359 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। समारोह का पहला दिन पीएचडी डिग्रियों और पदक विजेताओं को समर्पित रहा।

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया का स्वागत संस्थान के चांसलर डॉ. आर. आर. वेदराह ने किया। इस अवसर पर वाइस चांसलर प्रो. पद्मकुमार नायर, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. अजय बतिश और कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. ए. शिवथानु पिल्लई भी मंच पर उपस्थित रहे।

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने पीएचडी शोधार्थियों को डिग्रियां तथा विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के पदक विजेताओं को पदक प्रदान किए। पदक विजेताओं में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की भव्या गेरा ने 10.00 सीजीपीए हासिल कर प्रेसिडेंट मेडल और प्रो. वी. राजारामन कंप्यूटर साइंस/इंजीनियरिंग अवार्ड प्राप्त किया। गवर्नर मेडल कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (डेराबस्सी कैंपस) की कात्यायनी झा, एमसीए की साक्षी बालासो जाधव और एमबीए की वंशिता को प्रदान किए गए। इस वर्ष छह पदक विजेताओं ने 10.00 का परफेक्ट सीजीपीए हासिल किया।

इस अवसर पर संस्थान की ओर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 1966 बैच के पूर्व विद्यार्थी श्री विनोद के. लूथरा को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार (Distinguished Alumni Award) से सम्मानित किया गया। वह वर्ष 1981 में अपस्टेट न्यूयॉर्क में बैरिंगटन रेजिडेंशियल नामक मल्टीफैमिली हाउसिंग उद्यम के संस्थापक हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि जीवन की किसी भी लड़ाई को जीतने का एकमात्र साधन हमारा मन और हमारी शिक्षा है। यदि हम अपनी बुद्धि और शिक्षा का सही दिशा में उपयोग करें तो यही वास्तविक सफलता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान का वास्तविक महत्व इस बात में है कि वह विद्यार्थियों को हर तरह की चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाए। जब विद्यार्थी इन चुनौतियों से सफलतापूर्वक बाहर निकलते हैं तो यही दृढ़ता उनकी विशिष्ट ताकत बन जाती है। यही उनकी खास पहचान है और इसे हमेशा अपने साथ बनाए रखना चाहिए।

थापर इंस्टीट्यूट के चांसलर डॉ. आर. आर. वेदराह ने कहा कि जिंदगी 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि एक मैराथन है। इस बात की चिंता न करें कि 100 मीटर की दौड़ में आपसे आगे कौन है, बल्कि अंत तक पहुंचने वाला ही विजेता होता है। आपकी डिग्री दुनिया को बताती है कि आपने अब तक क्या सीखा है, लेकिन इसे आगे सीखने की इच्छा की सीमा कभी न बनने दें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बेहतर जिंदगी बनाने में इतने व्यस्त न हो जाएं कि अच्छी जिंदगी जीना ही भूल जाएं।

वाइस चांसलर प्रो. पद्मकुमार नायर ने कहा कि बाजार में आपकी कीमत आपकी मानवीय कीमत नहीं है और न ही पेशेवर सफलता अर्थपूर्ण जीवन का अंतिम मापदंड है। करियर केवल एक ऐसी सीढ़ी नहीं है, जिस पर चढ़ना है, बल्कि यह एक ऐसी संरचना है, जिसे हम स्वयं तैयार करते हैं, बनाते हैं, समय-समय पर संशोधित करते हैं और जरूरत पड़ने पर इसके कुछ हिस्सों को दोबारा बनाते हैं। यही महत्वाकांक्षा की वास्तविक संरचना है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक अच्छा इंसान बनना है।

विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार प्राप्त करने वाले श्री विनोद के. लूथरा ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1966 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी और 60 साल बाद इस सम्मान को प्राप्त करने के लिए दोबारा कैंपस में आना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1981 में अपना सफर शुरू किया था, तब उनके पास कोई बड़ी योजना नहीं थी। उन्होंने केवल मेहनत की, रास्ते में सीखते रहे और एक-एक कदम आगे बढ़ते गए। आज उनके इस सफर के माध्यम से 10,000 परिवारों को आवास की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस कैंपस ने उन्हें एक मजबूत नींव प्रदान की, जो पिछले 60 वर्षों से उनके साथ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को सीखना कभी न छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि शिक्षा डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि यह जीवनभर की जिम्मेदारी बन जाती है।

29 अक्टूबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, डिग्री प्राप्त करने वाले कुल 3,359 विद्यार्थियों में 2,507 बीई और बीटेक, 225 एमई और एमटेक, 194 एमबीए, 116 एमसीए, 89 एमएससी और 88 डॉक्टरेट के विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लिबरल आर्ट्स एवं साइंस कार्यक्रमों (एमए, बीए, बीबीए और बीएससी) के 140 विद्यार्थियों को भी डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।

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