नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को आधुनिक बनाने और देश की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के युद्धपोत बनाने के लिए कुल 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन युद्धपोतों का निर्माण पूरी तरह भारतीय डिजाइन और स्वदेशी तकनीक के आधार पर किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने 2 नवंबर को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में दो प्रमुख सरकारी रक्षा जहाज निर्माण कंपनियों गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ ये समझौते किए। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।
GRSE बनाएगी पांच और गोवा शिपयार्ड तीन युद्धपोत
समझौते के अनुसार, कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) पांच युद्धपोतों का निर्माण करेगी, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) तीन युद्धपोत तैयार करेगी। दोनों कंपनियों का चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आठों युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना स्वयं तैयार करेगी और इनका निर्माण देश की रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किया जाएगा। यह भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
हवा, समुद्र और पानी के भीतर दुश्मन से मुकाबले की क्षमता
इन अगली पीढ़ी के युद्धपोतों को आधुनिक मिसाइलों, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और उन्नत सेंसर तकनीक से लैस किया जाएगा। इनकी संरचना इस प्रकार तैयार की जाएगी कि ये हवा, समुद्र की सतह और पानी के भीतर से उत्पन्न होने वाले खतरों से निपट सकें।
इन युद्धपोतों की प्रमुख जिम्मेदारियों में दुश्मन के सतही युद्धपोतों के विरुद्ध कार्रवाई, पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों की रक्षा शामिल होगी। इसके अलावा, ये युद्धपोत तटीय एवं उथले समुद्री क्षेत्रों में सैन्य अभियानों और रणनीतिक समुद्री उपस्थिति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अगले 10 वर्षों में रोजगार के बड़े अवसर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना को भारत के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और जहाज निर्माण उद्योग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार, इस परियोजना से अगले 10 वर्षों में जहाज निर्माण शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव कार्य-दिवसों के रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, सहायक उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के माध्यम से लगभग 460 लाख मानव कार्य-दिवसों के रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। इससे रक्षा उत्पादन से जुड़े घरेलू उद्योगों, तकनीकी संस्थानों, उपकरण निर्माताओं और आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
आत्मनिर्भर भारत और समुद्री सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
यह परियोजना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सामरिक और समुद्री हितों की सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना की आधुनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करना रणनीतिक प्राथमिकता है।
स्वदेशी तकनीक, भारतीय सामग्री और देश में उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता के इस्तेमाल से इस परियोजना का उद्देश्य विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करना और भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना भी है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आठ अगली पीढ़ी के युद्धपोतों का निर्माण भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन अभियान और मेक इन इंडिया पहल को नई गति देगा। इससे न केवल भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश का घरेलू रक्षा औद्योगिक तंत्र भी मजबूत होगा।