Wednesday, November 4, 2026
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मिजोरम में देर रात भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.7 रही तीव्रता; चम्फाई जिले में था केंद्र

आइजोल, 4 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम में देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 दर्ज की गई। भूकंप रात करीब 11 बजकर 45 मिनट पर आया। इसका केंद्र मिजोरम के चम्फाई जिले में जमीन के भीतर लगभग 24 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा जारी प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह कम तीव्रता का भूकंपीय झटका था। हालांकि, भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। भूकंप की वास्तविक स्थिति और इसके प्रभाव का आकलन स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित एजेंसियों की सूचनाओं के आधार पर किया जाता है।

क्यों भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है पूर्वोत्तर भारत?

मिजोरम सहित पूर्वोत्तर भारत का बड़ा हिस्सा भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच भूगर्भीय गतिविधियों के कारण भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा इंडो-बर्मा पर्वतीय क्षेत्र में प्लेटों की हलचल भी भूकंपीय गतिविधियों को प्रभावित करती है।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भी आया था भूकंप

इससे पहले 30 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, उस भूकंप की तीव्रता 3.6 थी और इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर था। उस दौरान स्थानीय लोगों ने झटके महसूस होने पर घरों से बाहर निकलने की जानकारी दी थी।

कैसे आता है भूकंप?

पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब इनके बीच दबाव बढ़ता है और चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, तो भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं। ये तरंगें धरती की सतह तक पहुंचकर कंपन उत्पन्न करती हैं, जिसे भूकंप कहा जाता है।

भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाला नुकसान कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी, जमीन की प्रकृति और इमारतों की मजबूती शामिल हैं। कम तीव्रता के भूकंप भी कुछ क्षेत्रों में महसूस किए जा सकते हैं, जबकि कई बार अधिक गहराई पर आने वाले झटकों का प्रभाव सीमित रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहना, मजबूत मेज के नीचे सिर और गर्दन को ढकना तथा झटके रुकने के बाद खुले स्थान पर जाना महत्वपूर्ण है।

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