सुनाम, 21 जून 2026: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर द्वारा तेलबीज अनुभाग, प्लांट ब्रीडिंग एवं जेनेटिक्स विभाग, पीएयू लुधियाना के सहयोग से बसंत ऋतु की मूंगफली की किस्म जे-87 की खेत प्रदर्शन परियोजना को प्रदर्शित करने के लिए एक खेत दिवस आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गांव महलां, ब्लॉक सुनाम में प्रगतिशील किसान सरदार बेअंत सिंह और सरदार केवल सिंह के खेत में आयोजित किया गया।
डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पीएयू-केवीके संगरूर ने बताया कि इस खेत दिवस का मुख्य उद्देश्य किसानों को बसंत/गर्मी मौसम की मक्का के टिकाऊ विकल्प के रूप में मूंगफली के पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक लाभों के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने बताया कि बसंत ऋतु की मूंगफली को मक्का की तुलना में काफी कम पानी तथा कम मात्रा में उर्वरक और कीटनाशकों की आवश्यकता होती है, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। दलहनी फसल होने के कारण यह प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है।
मेजबान किसानों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में एक एकड़ क्षेत्र में सफल प्रयोग के बाद उन्होंने वर्ष 2026 में इसकी खेती का रकबा बढ़ाकर चार एकड़ कर दिया है। उन्होंने बताया कि मूंगफली की खेती की लागत बसंतकालीन मक्का की तुलना में लगभग 40 से 50 प्रतिशत कम है, जिससे यह आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी सिद्ध होती है।
तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. गुरप्रीत सिंह, विस्तार विशेषज्ञ (तेलबीज), पीएयू लुधियाना ने मूंगफली की अनुशंसित किस्मों और उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जे-87 किस्म की बसंत ऋतु में उत्पादन क्षमता लगभग 15.8 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि खरीफ (सावनी) मौसम में इसकी औसत उपज 12.8 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है।
डॉ. के.के. शर्मा, तेलबीज रोग विशेषज्ञ ने मूंगफली की विभिन्न बीमारियों और उनके प्रबंधन संबंधी जानकारी दी। वहीं डॉ. इंद्रजीत सिंह भट्टी, ब्लॉक कृषि अधिकारी, सुनाम ने भूजल संरक्षण पर जोर देते हुए किसानों से मूंगफली जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने की अपील की। उन्होंने सीधे बीजे गए धान (डीएसआर) तथा खरीफ मक्का को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही सब्सिडी योजनाओं की जानकारी भी दी और किसानों को सब्सिडी वाले बीज, उर्वरक तथा अन्य लाभ प्राप्त करने हेतु किसान आईडी के तहत पंजीकरण करवाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में कृषि विशेषज्ञों और किसानों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया तथा आने वाले वर्षों में बसंत ऋतु की मूंगफली की खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कृषि मशीनरी की उपलब्धता और विपणन सुविधाओं पर सार्थक विचार-विमर्श किया।
अंत में डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।