स्वास्थ्य विभाग 7 जुलाई से 22 जुलाई तक मनाएगा ‘जीरो प्रिवेंटेबल मैटरनल डेथ‘ पखवाड़ा
चंडीगढ़, 6 जुलाई, 2026 : हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य में प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण और व्यापक मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामुदायिक स्तर पर पहुंच (कम्युनिटी आउटरीच) को और तेज किया जाए ताकि कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक प्रसव-पूर्व देखभाल (एंटीनैटल केयर) अथवा संस्थागत प्रसव सेवाओं से वंचित न रहे।
आरती सिंह राव ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा राज्य में मातृ मृत्यु दर को और कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), हरियाणा ने प्रदेश के सभी जिलों में 7 जुलाई से 22 जुलाई तक ‘जीरो प्रिवेंटेबल मैटरनल डेथ‘ (शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु) पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और समग्र मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों, ताकि ऐसी कोई भी मातृ मृत्यु न हो जिसे रोका जा सकता था। यह पहल माताओं के जीवन की सुरक्षा तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के सर्वोच्च मानकों को हासिल करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सुलभ, न्यायसंगत और उच्च गुणवत्ता वाली मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा विशेषज्ञों, सहयोगी संस्थाओं तथा समाज के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से राज्य का लक्ष्य इस पखवाड़े को माताओं के जीवन की रक्षा तथा हरियाणा की प्रत्येक महिला के लिए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से पखवाड़े के दौरान आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने परिवारों से भी आग्रह किया कि वे गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव-पूर्व जांच कराने, जोखिम के संकेतों की समय रहते पहचान करने तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रेरित करें।
एनएचएम हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर. एस. ढिल्लों ने इस अवसर पर अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी सिविल सर्जनों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में सिविल सर्जनों को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, प्रसव-पूर्व देखभाल सेवाओं को मजबूत करने, समय पर रेफरल सुनिश्चित करने, प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में 24 घंटे तैयारी बनाए रखने तथा विशेष निगरानी की आवश्यकता वाली प्रत्येक गर्भवती महिला पर सतत नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निगरानी रखने तथा किसी भी प्रसूति आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
डॉ. ढिल्लों ने आगे कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं फॉलो-अप, समय पर रेफरल और परिवहन, रक्त एवं रक्त अवयवों की उपलब्धता, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं तथा लेबर रूम एवं प्रसूति सुविधाओं के निर्बाध संचालन पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य टीमों को आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्टाफ नर्सों और चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से सामुदायिक पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक प्रसव-पूर्व देखभाल या संस्थागत प्रसव सेवाओं से वंचित न रहे।
एनएचएम के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य को साझा जिम्मेदारी मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष तथा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (फॉगसी) के हरियाणा चैप्टर के अध्यक्षों से सक्रिय सहयोग और सहभागिता का अनुरोध किया है। इन संस्थाओं से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा ‘जीरो प्रिवेंटेबल मैटरनल डेथ’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में हरसंभव सहयोग देने का आग्रह किया गया है।
डॉ. वीरेंद्र यादव ने आगे बताया कि आईएमए तथा फॉगसी से जुड़े सभी निजी चिकित्सक अपने-अपने अस्पतालों में प्रसव के 7 दिनों के भीतर सभी प्रसूता महिलाओं को दो निःशुल्क प्रसवोत्तर (पोस्टनेटल) जांच उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल गुणवत्तापूर्ण प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित करेगी तथा ऐसे किसी भी उच्च जोखिम वाले कारकों की समय पर पहचान और उपचार में मदद करेगी, जो स्तनपान कराने वाली मां के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।






