चंडीगढ़, 10 जुलाई, 2026 : हरियाणा सरकार की टेली-ईसीजी सेवा हृदय रोगियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। सेवा शुरू होने के महज सवा महीने के भीतर प्रदेशभर में 2,688 मरीजों को इसका लाभ मिला है, जबकि ‘गोल्डन ऑवर’ में समय पर जांच और उपचार मिलने से 131 गंभीर मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह डिजिटल पहल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 29 मई 2026 को पंचकूला से इस सेवा का शुभारंभ किया था। वर्तमान में यह सुविधा प्रदेश के 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, जिनमें जिला नागरिक अस्पताल, उपमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं, में उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों के मरीजों को अपने क्षेत्र में ही हृदय रोग विशेषज्ञों की सलाह मिल रही है, जिससे इलाज में होने वाली देरी कम हुई है और बड़े अस्पतालों में अनावश्यक रेफरल की आवश्यकता भी घट रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हृदयाघात के बाद का पहला घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। इसी अवधि में त्वरित ईसीजी जांच और विशेषज्ञ की सलाह मिलने से मरीज की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। टेली-ईसीजी सेवा के तहत केवल 89 रुपये की लागत पर 10 मिनट के भीतर विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा ईसीजी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य हृदय रोगों से होने वाली अकाल मौतों में एक-तिहाई तक कमी लाना है।
प्रदेश में इस परियोजना के तहत प्रतिवर्ष लगभग 3.28 लाख ईसीजी जांच किए जाने का अनुमान है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 2.92 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि टेली-ईसीजी सेवा हरियाणा के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल है और आने वाले समय में यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति का आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे नागरिक तक भी विश्वस्तरीय और त्वरित चिकित्सा सुविधा पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की सेवाएं अब गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस योजना की प्रेरणा एक दुखद घटना से मिली, जिसमें एक उपमंडल स्वास्थ्य केंद्र में ईसीजी सुविधा उपलब्ध न होने के कारण हृदयाघात से पीड़ित मरीज की समय पर पहचान नहीं हो सकी और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद उन्होंने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ईसीजी सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी पहल का परिणाम है कि आज प्रदेश के 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टेली-ईसीजी सेवा संचालित हो रही है और अब तक 131 से अधिक गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है।






