हरियाणा, 28 जुलाई,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। इन संशोधनों का उद्देश्य पटवारियों की भर्ती और प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाना, सेवा शर्तों में सुधार करना और राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी व जवाबदेह बनाना है। संशोधित नियम 1 जनवरी 2025 से लागू माने जाएंगे।
मंत्रिमंडल के प्रमुख फैसले के अनुसार, नवनियुक्त पटवारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दिया गया है। अब प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवार स्कूल में छह महीने की संस्थागत ट्रेनिंग और इसके बाद छह महीने की फील्ड ट्रेनिंग शामिल होगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रशिक्षित पटवारी जल्द ही फील्ड ड्यूटी के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। कैबिनेट ने नवनियुक्त पटवारियों की सेवा शर्तों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड के स्थान पर अब उन्हें फंक्शनल पे-लेवल-2 के तहत 19,900 रुपये का प्रारंभिक वेतन मिलेगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्हें पहले के फंक्शनल पे-लेवल-4 की जगह फंक्शनल पे-लेवल-5ए में रखा जाएगा, जिसमें 32,100 रुपये से 1,02,000 रुपये तक का वेतनमान होगा।
संशोधित नियमों के अनुसार, अस्थायी रूप से नियुक्त प्रत्येक पटवारी को निर्धारित अवधि में विभागीय परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार अवसर दिए जाएंगे। वहीं, प्रशिक्षण अवधि के दौरान किसी भी वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ नहीं मिलेगा और पहला इंक्रीमेंट नियमित नियुक्ति के एक वर्ष बाद दिया जाएगा। कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नियुक्ति के लिए जिलों की प्राथमिकता संबंधी नियमों में भी बदलाव किया है। अब उम्मीदवार केवल पांच जिलों की जगह सभी जिलों को विकल्प के रूप में चुन सकेंगे। इसके अलावा, राजस्व पटवारियों को हरियाणा सिविल सेवाएं (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत लाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत अनुशासनात्मक और अपीलीय मामलों के लिए संशोधित प्रावधान लागू होंगे।
मंत्रिमंडल ने पटवारियों की विभागीय परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया है। नए पाठ्यक्रम में कंप्यूटर एप्लीकेशन, भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, नई तकनीक, डैशबोर्ड, पोर्टल और डिजिटल गवर्नेंस प्रणालियों को शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, इससे पटवारी आधुनिक तकनीक आधारित राजस्व प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेंगे।






