हरियाणा, 7 अगस्त,2026 (संजीव सिंगला): हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि राज्य को आपदा-रोधी बनाने के लिए सरकारी परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और बजट निर्माण के प्रत्येक चरण में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के उपायों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इस पहल का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को केवल आपदा के बाद की प्रतिक्रिया तक सीमित न रखकर शासन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जारी आदेशों में डॉ. मिश्रा ने कहा कि सभी विभाग आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार आपदा रोकथाम और जोखिम न्यूनीकरण के उपायों को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी नई और पहले से चल रही विकास परियोजनाओं में प्रारंभिक योजना स्तर से ही आपदा-रोधी क्षमता को ध्यान में रखा जाए। साथ ही, विभागों को आपदा प्रबंधन संबंधी गतिविधियों के लिए आवश्यक बजट का भी प्रावधान करने को कहा गया है। उनका कहना है कि तैयारी और रोकथाम ही लोगों की जान, बुनियादी ढांचे और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है।
इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सभी विभागों को आपदा प्रबंधन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में अपनाए गए रोकथाम और सुरक्षा उपायों का विस्तृत विवरण शामिल होगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग इन रिपोर्टों को संकलित कर भारत सरकार को भेजेगा।
डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि आपदा जोखिम को कम करना प्रत्येक विभाग के नियमित कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके। उन्होंने कहा कि इस पहल से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और राज्य की बाढ़, लू, तूफान तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य राज्य को भविष्य की प्राकृतिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास परियोजनाएं केवल प्रगति तक सीमित न रहें, बल्कि वे आपदा-रोधी और टिकाऊ भी हों।






