हरियाणा, 7 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने सुशासन और कारोबार में सुगमता को नई दिशा देते हुए केंद्र सरकार के ‘कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन एक्सरसाइज’ के दूसरे चरण के तहत चिन्हित 28 प्रमुख सुधारों में से 21 सुधारों को मंजूरी दे दी है या उनका क्रियान्वयन शुरू कर दिया है।
यह जानकारी मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्र और राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद दी। बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय में विशेष सचिव के.के. पाठक ने की।
मुख्य सचिव ने बताया कि इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक नियामकीय प्रक्रियाओं को समाप्त करना, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाना, डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देना तथा उद्योगों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और आम नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी एवं अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।
समीक्षा बैठक में भूमि नियमन, औद्योगिक विकास, भवन निर्माण अनुमति, व्यापार लाइसेंस, श्रम सुधार, बिजली, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार सहित 28 प्रमुख क्षेत्रों में राज्य की प्रगति की समीक्षा की गई। विभिन्न विभागों ने शेष सुधारों को लागू करने के लिए अपनी कार्ययोजना भी प्रस्तुत की।
अनुराग रस्तोगी ने कहा कि हरियाणा तेजी से संरचनात्मक सुधारों को लागू कर रहा है, जिससे न केवल अनुपालन लागत कम होगी, बल्कि सुशासन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक प्लॉटों के उप-विभाजन, खाली प्लॉटों को लीज पर देने तथा लीज अवधि पूरी होने के बाद लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा और औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
उन्होंने बताया कि संशोधित हरियाणा भवन संहिता के तहत उद्योगों के लिए फ्लोर एरिया रेशियो ,ग्राउंड कवरेज और सेटबैक संबंधी नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है, जिससे औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये के विशेष फंड का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस फंड से औद्योगिक क्षेत्रों में साझा बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (HEPC) को निवेशकों के लिए और अधिक प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए एक पेशेवर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जाएगी, जो निवेशकों को मंजूरी प्रक्रिया के हर चरण में सहयोग देगी, विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी और कानूनी मंजूरियों में होने वाली देरी को कम करेगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार डिजिटल प्रशासन को और मजबूत कर रही है। इसके तहत राज्य के सभी अधिनियमों, नियमों और सरकारी आदेशों की डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार की जा रही है। साथ ही, सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता की निगरानी और हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत ऑटो-अपील प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि व्यापार लाइसेंस प्रणाली को सरल बनाने, लीगल मेट्रोलॉजी से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार, बिजली कनेक्शन जल्द उपलब्ध कराने, भवन निर्माण स्वीकृति को आसान बनाने और एमएसएमई के लिए स्व-प्रमाणीकरण व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में भी व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों से अनुपालन लागत घटेगी और उद्योगों को कारोबार शुरू करने और विस्तार करने में आसानी होगी।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधारों को पूरा करने, लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने तथा केंद्र सरकार से संबंधित मंजूरियों के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें मंजूरियां तेजी से मिलें, प्रक्रियाएं सरल हों और नागरिकों को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। राज्य सरकार का लक्ष्य अनावश्यक अनुपालनों को कम करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा ऐसा वातावरण तैयार करना है, जो निवेश, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करे।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, अग्निशमन सेवा विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जतिंदर कुमार, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक अमित खत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






