Thursday, August 27, 2026
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संस्थागत सहयोग मजबूत करने के लिए समर्पित एम.एस.एम.ई. निदेशालय की स्थापना

 11 अगस्त ,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के सातवें दशक में प्रवेश के साथ मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के 15 लाख एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को आर्थिक विकास के अगले चरण का प्रमुख आधार बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने इसके लिए हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत पांच वर्ष का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को करनाल में हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 को लॉन्च किया। इसका लक्ष्य 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश आकर्षित करना, 5 लाख से अधिक नए रोजगार पैदा करना और वर्ष 2031 तक हरियाणा के निर्यात को दोगुना करना है।

नीति में वित्त, औद्योगिक ढांचा, तकनीक, नवाचार, निर्यात, स्थिरता और कौशल विकास सहित 60 महत्वपूर्ण पहल शामिल की गई हैं। सरकार का जोर केवल नए उद्योग स्थापित करने पर नहीं, बल्कि पहले से संचालित उद्योगों के विस्तार, आधुनिकीकरण और उन्हें देश-विदेश के बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने पर भी है।

एमएसएमई के लिए बनेगा अलग निदेशालय:

नीति के तहत एक समर्पित एमएसएमई निदेशालय स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य के विशाल एमएसएमई क्षेत्र को एक ही स्थान से संस्थागत सहायता प्रदान करना और उद्योगों के विकास के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। यह निदेशालय निवेश, नई तकनीक अपनाने, वित्त तक पहुंच, बुनियादी ढांचे और बाजार उपलब्ध कराने में एमएसएमई की मदद करेगा।

नए उद्योगों के साथ पुराने उद्योगों के विस्तार पर जोर:

नई नीति का फोकस केवल नए उद्योग शुरू करवाने तक सीमित नहीं है। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, आधुनिकीकरण और मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठने के लिए भी सहायता दी जाएगी। हरियाणा उद्योग विकास मिशन के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एमएसएमई को पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी की वापसी, रोजगार सृजन सहायता, बीमा सहायता तथा परीक्षण, स्वचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। वित्त तक पहुंच आसान बनाने और बिना जमानत ऋण को बढ़ावा देने के लिए राज्य वेंचर कैपिटल फंड और सेक्टोरल क्रेडिट गारंटी फंड भी प्रस्तावित किए गए हैं।

2031 तक निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य:

हरियाणा के सातवें दशक में प्रवेश के साथ शुरू किया गया यह 60 पहलों वाला पांच वर्षीय रोडमैप राज्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योगों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश आकर्षित करना, 5 लाख से अधिक नए रोजगार पैदा करना और वर्ष 2031 तक निर्यात को दोगुना करना है। इसके माध्यम से हरियाणा को एक मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने तथा विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में राज्य की भूमिका को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

मजबूत औद्योगिक ढांचा और कारोबार में आसानी:

नीति के तहत बड़े क्लस्टर, प्लग एंड प्ले औद्योगिक एस्टेट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि उद्योग स्थापित करने में लगने वाला समय, लागत और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता कम हो। इसके साथ ही एमएसएमई राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया को और सरल बनाना है।

हरियाणा के उद्योगों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने के लिए स्वचालन, इंडस्ट्री 4.0, एआई, उन्नत विनिर्माण, गुणवत्ता प्रमाणन तथा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए नए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे और उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित की जाएगी। भारत सरकार के RAMP कार्यक्रम के साथ भी बेहतर समन्वय किया जाएगा।

स्थानीय बाजार से वैश्विक बाजार तक पहुंचेगा हरियाणा का एमएसएमई:

नई नीति का एक बड़ा लक्ष्य हरियाणा के एमएसएमई को स्थानीय बाजार से निकालकर वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण और बीमा, माल ढुलाई सहायता, ई-कॉमर्स पंजीकरण तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री पहली निर्यातक प्रोत्साहन योजना के तहत पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को उनके पहले अंतरराष्ट्रीय खरीदार को सुरक्षित करने की लागत में सहायता दी जाएगी।

हरियाणा निर्यात केंद्र निर्यात दस्तावेजीकरण, नियमों के अनुपालन, लॉजिस्टिक्स, बाजार की जानकारी और विदेशी खरीदारों से संपर्क के लिए एक ही मंच के रूप में काम करेगा। वहीं, उड़ान द्वार के माध्यम से निर्यात के लिए व्यावसायिक संपर्क, तकनीकी साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय संयुक्त उपक्रम और निवेशकों से जुड़ने की प्रक्रिया आसान की जाएगी। रिवर्स बायर-सेलर मीट, अंतरराष्ट्रीय रोड शो, डिजिटल एमएसएमई पवेलियन और विक्रेता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणा के उद्यमों को घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ा जाएगा।

एआई आधारित ‘हरियाणा उद्योग साथी’ लॉन्च:

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने उद्योगों को सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए एआई आधारित बहुभाषी ‘हरियाणा उद्योग साथी’ भी लॉन्च किया है।

इस माध्यम से उद्यमी प्रोत्साहनों, पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी आवाज या टेक्स्ट के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। यह प्लेटफॉर्म हिंदी, अंग्रेजी, हिंग्लिश, हरियाणवी और पंजाबी में सहायता प्रदान करेगा। ‘हरियाणा उद्योग साथी’ के दायरे में हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 तथा हरियाणा कृषि-व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 भी शामिल हैं।

हरित और समावेशी विकास पर विशेष जोर:

हरियाणा के अगले औद्योगिक चरण में हरित और समावेशी विकास को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नीति के तहत स्वच्छ उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम स्थापित करने में सहायता देने का प्रावधान है। साथ ही एक समर्पित ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड भी प्रस्तावित किया गया है।

महिलाओं, अनुसूचित जातियों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर उद्यमियों, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जाएंगी। कौशल विकास, रोजगार सृजन और संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के लिए भी विभिन्न कदम उठाए जाएंगे।

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