Thursday, August 27, 2026
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यमुना पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुद्धार के लिए समयबद्ध कार्य योजना

11 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने यमुना नदी और इससे जुड़े जल स्रोतों की स्थिति में सुधार के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई यमुना कार्य योजना की समीक्षा बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक गंदे पानी के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी), ठोस कचरा प्रबंधन, यमुना किनारे बसे गांवों में सीवेज प्रबंधन, जल स्रोतों के पुनरुद्धार और नए बायोगैस प्लांट स्थापित करने सहित विभिन्न कार्यों की समीक्षा की गई। इन योजनाओं में सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर सहित विभिन्न शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रोजेक्टों को योजना और टेंडर प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर निर्धारित समय में पूरा करने तथा लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना और इससे जुड़े जल स्रोतों की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक गंदे पानी का प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन और जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि गुरुग्राम में चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विभिन्न चरणों में हैं। इनमें धनवापुर में 100 एमएलडी, बहेरामपुर में 100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी क्षमता के प्लांट शामिल हैं। इन परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी बोलियां (टेंडर) अगस्त और सितंबर में खोले जाने का प्रस्ताव है।

फरीदाबाद में 20 एमएलडी क्षमता वाले मिर्जापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य है, जबकि 20 एमएलडी क्षमता वाले सूरजकुंड प्रोजेक्ट की तकनीकी बोलियां 24 अगस्त तक खोले जाने का प्रस्ताव है। सोनीपत में 7.5 एमएलडी क्षमता वाले कुंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू करने का लक्ष्य है। पानीपत के समालखा में प्रस्तावित 4 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की वित्तीय बोलियां 25 अगस्त तक खोले जाने का प्रस्ताव है।

सरकार द्वारा औद्योगिक गंदे पानी के ट्रीटमेंट की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी क्षमता वाले कॉमन इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-34 में 20 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट की तकनीकी बोलियां 3 अगस्त को खोली गईं। इसके अलावा गुरुग्राम के बादशाहपुर में 15 एमएलडी और सेक्टर-37 में 9 एमएलडी क्षमता वाले कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट सहित अन्य परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में यमुना किनारे बसे गांवों के लिए तैयार की गई सीवेज प्रबंधन योजना की भी समीक्षा की गई। इसके तहत सोनीपत, करनाल और पानीपत के गांवों में थ्री-पॉन्ड सिस्टम और छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के माध्यम से सीवेज का उपचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यमुना के पुनरुद्धार के लिए केवल शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि नदी के किनारे बसे गांवों में भी प्रभावी सीवेज प्रबंधन जरूरी है।

यमुना पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 जल स्रोतों को पुनरुद्धार के लिए चिन्हित किया गया है। इन जल स्रोतों का कुल क्षेत्रफल 19.12 हेक्टेयर है। इन स्थानों पर प्रदूषण का मुख्य कारण घरेलू सीवेज पाया गया है और पुनरुद्धार का कार्य 31 दिसंबर, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को भी यमुना कार्य योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। वर्तमान योजना में 33 शहरी स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें से 27 शहरी स्थानीय निकायों में 22 वर्ष की अवधि के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के ठेके दिए जा चुके हैं, जबकि 6 शहरी स्थानीय निकायों में टेंडर प्रक्रिया जारी है।

हरियाणा में कचरे से संसाधन जुटाने की दिशा में नए बायोगैस प्लांट भी स्थापित किए जा रहे हैं। प्रस्तावित तीन प्लांटों की कुल क्षमता 650 टन प्रतिदिन होगी। इनमें सोनीपत के राई-जाखौली में 400 टन प्रतिदिन, फरीदाबाद के मोहना-बल्लभगढ़ में 100 टन प्रतिदिन और यमुनानगर में 150 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट शामिल है। सोनीपत परियोजना का निर्माण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है, फरीदाबाद परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है, जबकि यमुनानगर परियोजना के टेंडर के बाद तकनीकी समीक्षा की जा रही है।

बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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