Thursday, August 27, 2026
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कैबिनेट ने हरियाणा की बढ़ती जल चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को दी मंजूरी

14 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के जल भविष्य को सुरक्षित करने और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। कार्यक्रम की अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है।

एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम के तहत भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई दक्षता, पानी की उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में पानी के सतत उपयोग जैसी चुनौतियों पर काम किया जाएगा। इस पहल के तहत चयनित सिंचाई क्लस्टरों में करीब 45 लाख लोगों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में 4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा।

यह कार्यक्रम 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। इसके तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग माइक्रो इरिगेशन एंड कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न कार्य किए जाएंगे।

जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन को मिलेगा बढ़ावा

वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम राज्य की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, पानी के संचार में होने वाली क्षति कम होगी और भूजल दोहन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के जरिए पानी की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। साथ ही माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने और जलभराव वाले क्षेत्रों के सुधार पर भी जोर दिया जाएगा। डायरेक्ट सीडेड राइस और फसल विविधीकरण जैसे उपायों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग कम करने का प्रयास किया जाएगा। पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण प्रणाली और रियल-टाइम डेटा अधिग्रहण प्रणाली प्रणालियों की स्थापना से नहरों और जल संसाधनों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे संचालन और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर होगी।

निर्माण परियोजना नहीं, एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम

हरियाणा के जल संसाधनों पर लगातार बढ़ता दबाव गंभीर चुनौती बना हुआ है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट, अत्यधिक दोहन, सिंचाई के लिए भूजल पर बढ़ती निर्भरता, पुराना नहर ढांचा, जलभराव और खारापन तथा भूजल पंपिंग के लिए बढ़ती ऊर्जा जरूरत जैसी समस्याएं सामने हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए WSHP को केवल पारंपरिक निर्माण परियोजना के बजाय एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है।

104 नहर चैनलों का होगा पुनर्निर्माण

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तहत करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इससे करीब 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया को लाभ मिलेगा।

नहरों के पुनर्निर्माण, लाइनिंग और अन्य सुधार कार्यों से पानी के संचार में होने वाला नुकसान कम होगा तथा सिंचाई सेवाओं की विश्वसनीयता और दक्षता बढ़ेगी।

इसके अलावा करीब 248 करोड़ रुपये की लागत से 131 नए जल भंडारण ढांचे बनाए जाएंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देना होगा।

उपचारित पानी का सिंचाई में होगा पुन: उपयोग

कार्यक्रम के तहत चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट  से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग किया जाएगा। इस पर करीब 282.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

डिजिटल जल प्रबंधन के तहत नहरों के स्वचालित और रियल टाइम संचालन के लिए 20 SCADA साइट और पानी के डिस्चार्ज व प्रवाह की निगरानी के लिए 400 RTDAS साइट/माप बिंदु स्थापित किए जाएंगे। इससे डेटा आधारित नहर संचालन और जल प्रबंधन में पारदर्शिता व दक्षता बढ़ेगी।

MICADA और कृषि विभाग की योजनाओं से घटेगी पानी की मांग

MICADA के तहत करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से 620 वाटरकोर्स का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 120 नहर आधारित माइक्रो इरिगेशन परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तहत करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि में वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के जरिए सुधार किया जाएगा।

इसके साथ ही करीब 5 लाख एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) को बढ़ावा दिया जाएगा और ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत लगभग 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण किया जाएगा।

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