14 अगस्त, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण एवं विनियमन) नियम, 2026’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसका उद्देश्य प्रदेश में निजी कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और संचालन के लिए प्रभावी नियामक ढांचा तैयार करना है।
ये नियम ‘हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम, 2024’ के तहत बनाए गए हैं। इनके माध्यम से उच्च शिक्षा, सरकारी व निजी नौकरियों, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण और नियमन किया जाएगा। यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा जनवरी 2024 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
पंजीकरण के लिए 10 हजार रुपये शुल्क
नए नियमों के तहत सभी मौजूदा निजी कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ नए कोचिंग सेंटर शुरू करने वाले संस्थानों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण शुल्क 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।
संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदन की जांच करेगा। आवेदन पूरी तरह सही पाए जाने पर तीन साल की अवधि के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
पंजीकरण के नवीनीकरण का भी प्रावधान किया गया है। संस्थान को प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये नवीनीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा।
संस्थानों को वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी
नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने, संबंधित प्राधिकरण को वार्षिक जानकारी उपलब्ध कराने और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जरूरी विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा।
संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम, कोर्स सामग्री, फीस स्ट्रक्चर, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रत्येक बैच में अधिकतम विद्यार्थियों की संख्या तथा प्रशिक्षण, काउंसलिंग और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की योग्यता एवं बायोडाटा जैसी जानकारी देनी होगी।
विद्यार्थियों के लिए जरूरी सुविधाएं अनिवार्य
नियमों के तहत विद्यार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। इनमें पर्याप्त फर्नीचर, उचित रोशनी, पीने का पानी, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय और अग्नि सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
इसके अलावा मेडिकल सहायता या फर्स्ट-एड, पार्किंग, लाइब्रेरी या रीडिंग रूम, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर लैब, हॉस्टल और कैंटीन जैसी सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
भवन की सुरक्षा और स्टाफ की जांच
कोचिंग संस्थानों को भवन से संबंधित जानकारी भी देनी होगी। इसमें भवन स्वयं का है या किराए/लीज पर लिया गया है, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भवन के बैरियर-फ्री होने की जानकारी शामिल होगी।
इसके साथ ही संस्थान के स्टाफ के चरित्र और पृष्ठभूमि की जांच से संबंधित विवरण देना भी जरूरी होगा।
स्कूल समय में नहीं लगेंगी कोचिंग कक्षाएं
नियमों के तहत यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल या अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कोचिंग कक्षाएं उनके नियमित अध्ययन या कार्य के समय के दौरान आयोजित न की जाएं।
सरकार के अनुसार, इस नियामक व्यवस्था का उद्देश्य निजी कोचिंग संस्थानों को पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित तरीके से संचालित करना है। साथ ही इससे सरकार को संस्थानों की निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी तंत्र उपलब्ध होगा।






