नई दिल्ली,27 अगस्त,2026 (राजेश कुमार): भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कलौंजी सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल लंबे समय से पारंपरिक स्वास्थ्य उपायों में भी किया जाता रहा है। इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन जैसे सक्रिय तत्वों पर एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभावों को लेकर शोध हुए हैं।
कलौंजी का सेवन कुछ लोग पाचन, मेटाबॉलिक हेल्थ और शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में मदद के लिए करते हैं। वहीं, इसे तेल के साथ मिलाकर स्कैल्प पर लगाने का इस्तेमाल बालों और त्वचा की देखभाल में भी किया जाता है।
कैसे करें इस्तेमाल?
- खाने के बाद थोड़ी मात्रा में कलौंजी ली जा सकती है।
- इसे गुनगुने पानी या शहद के साथ भी लिया जाता है।
- त्वचा या बालों पर लगाने के लिए इसे किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाना बेहतर है।
- संवेदनशील त्वचा पर इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए। कलौंजी किसी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं है। खासकर डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में इसका नियमित सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है।





