चंडीगढ़, 31 अगस्त, 2026 (विशाल गुप्ता): पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर लंबे समय से चिंता के बीच अब कुछ राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की वर्ष 2026 की ताजा ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में भूजल दोहन की दर में कमी आई है। इसके साथ ही चार ब्लॉक अब सुरक्षित श्रेणी में पहुंच गए हैं, जबकि 14 ब्लॉकों की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में पंजाब में भूजल दोहन का स्तर 156.36 प्रतिशत था, जो वर्ष 2026 में घटकर 152.22 प्रतिशत रह गया है। चार साल पहले वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 163.80 प्रतिशत था। इसी अवधि में भूजल निकासी 28.01 अरब क्यूबिक मीटर से घटकर 26.32 अरब क्यूबिक मीटर हो गई है।
चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में शामिल
भूजल की स्थिति में सुधार के चलते फाजिल्का के अर्नीवाला, फिरोजपुर के मक्खू, होशियारपुर के हाजीपुर और पठानकोट के नरोट जैमल सिंह वाला ब्लॉक अब सुरक्षित जोन में आ गए हैं। ये ब्लॉक पहले सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में थे।
वहीं, रूपनगर का ब्लॉक, जो पहले सुरक्षित श्रेणी में था, अब सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गया है। इसके अलावा फिरोजपुर, ममदोट, गुरदासपुर, काहनूवान, श्री हरगोबिंद, भुंगा, होशियारपुर-2, माहिलपुर, कोट ईसे खां और औड़ सहित कई ब्लॉकों में भी भूजल दोहन की स्थिति बेहतर हुई है।
153 ब्लॉकों में 110 अभी भी अति-शोषित
राज्य में कुल 153 ब्लॉक हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 110 ब्लॉक अति-शोषित, 6 क्रिटिकल, 17 सेमी-क्रिटिकल और 20 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में हैं। आंकड़े बताते हैं कि सुधार के बावजूद पंजाब के बड़े हिस्से में भूजल संकट अभी गंभीर बना हुआ है।
वर्ष 2026 में राज्य में कुल 26.32 अरब क्यूबिक मीटर भूजल निकाला गया। इसमें करीब 24.95 अरब क्यूबिक मीटर पानी कृषि सिंचाई में इस्तेमाल हुआ, जबकि 1.38 अरब क्यूबिक मीटर पानी घरेलू और औद्योगिक जरूरतों के लिए निकाला गया।
भूजल रिचार्ज में भी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में भूजल रिचार्ज के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। वर्ष 2026 में राज्य में कुल वार्षिक भूजल रिचार्ज 19.14 अरब क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया।
बारिश के जरिए होने वाला रिचार्ज भी बढ़ा है। वर्ष 2026 में बारिश से 5.53 अरब क्यूबिक मीटर भूजल रिचार्ज हुआ, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 5.43 अरब क्यूबिक मीटर था।
नहरी पानी बढ़ने से भूजल पर दबाव कम होने की उम्मीद
जल संसाधन विभाग की ओर से नहरी पानी के इस्तेमाल और उसके विस्तार पर दिए जा रहे जोर का असर भी दिखाई दे रहा है। नहरी पानी से होने वाला भूजल रिचार्ज अब बढ़कर करीब 5.5 अरब क्यूबिक मीटर हो गया है, जबकि वर्ष 2021-22 में यह लगभग 4.5 अरब क्यूबिक मीटर था।
डेरा बाबा नानक और अजनाला क्षेत्रों में बाढ़ के कारण भी भूजल रिचार्ज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अभी लंबी राह बाकी
भूजल दोहन में कमी और कुछ ब्लॉकों का सुरक्षित श्रेणी में आना पंजाब के लिए निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है। हालांकि, राज्य के 110 ब्लॉकों का अति-शोषित श्रेणी में बने रहना यह बताता है कि भूजल संरक्षण की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। कृषि में पानी की खपत कम करने, नहरी पानी का दायरा बढ़ाने और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों को लगातार मजबूत करना जरूरी होगा।






