कुरुक्षेत्र,7 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चंडीगढ़ द्वारा कुरुक्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बैंकर्स की वित्तपोषण क्षमता निर्माण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मिशन (एनएएमसीएबीएस) कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप का उद्घाटन भारतीय रिजर्व बैंक चंडीगढ़ के महाप्रबंधक आफिसर-इन-चार्ज पंकज सेतिया ने किया।
आईबीआई चंडीगढ़ के महाप्रबंधक आफिसर-इन-चार्ज पंकज सेतिया ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वृद्धि और रोजगार सृजन में बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कार्यशाला भागीदारों के लिए उत्तम पद्धतियों, नीतिगत दिशानिर्देशों तथा एमएसएमई वित्तपोषण के नवीन दृष्टिकोणों के संबंध में अपनी जानकारी अद्यतन करने का एक अवसर है। उन्होंने बैंकरों से आह्वान किया कि वे अधिक संवेदनशील एवं उद्यम मित्र दृष्टिकोण अपनाए, विशेषता वर्तमान वैश्विक परिवेश में, जहां स्थानीय विनिर्माण को सुदृढ़ करना 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों का संचालन आरबीआई, सिडबी, एमएसएमई डीएफओ और ट्रांसयूनियन सिबिल के विषय-विशेषज्ञों तथा वाणिज्यिक बैंकों के अनुभवी संकाय सदस्यों द्वारा किया गया। इन सत्रों में एमएसएमई ऋण आकलन, जोखिम प्रशमन, फिनटेक समाधान और नियामक स्तर पर हुए परिवर्तनों के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।

बैंकरों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु रिजर्व बैंक की पहल की सराहना व्यक्त की तथा उन्होंने बताया कि प्राप्त ज्ञान से उन्हें व्यावहारिक स्तर पर लाभक्षम एमएसएमई इकाइयों को अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग प्रदान करने में सहायता मिलेगी। एनएएमसीएबीएस कार्यशाला को बैंकरों को उद्यमिता को पोषित करने, औपचारिक वित्त तक पहुंच का विस्तार करने और एमएसएमई क्षेत्र की सतत वृद्धि को गति देने हेतु अपेक्षित व्यावहारिक अंतर्दृष्टि एवं उपकरणों से सुसज्जित करने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस मौके पर पंजाब नेशनल बैंक के सीजीएम आशीष कुमार चतुर्वेदी, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के जीएम बिनोद कुमार सिन्हा, एचडीएफसी बैंक के जोनल हेड धीरज सेठी और हरियाणा ग्रामीण बैंक के जीएम वेद प्रकाश सहित हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर जिलों के 21 अलग-अलग बैंकों के लगभग 80 बैंकर शामिल हुए, जो एमएसएमई को लोन देने का काम देखते है।






