हरियाणा, 10 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा में जल एवं वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार, गांवों में अपशिष्ट जल प्रबंधन, बायोगैस, पराली प्रबंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां यमुना एक्शन प्लान तथा दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न विभागों को निर्धारित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
यमुना एक्शन प्लान की समीक्षा के दौरान यमुना बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), गांव स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन और बायोगैस परियोजनाओं की जिलेवार प्रगति का जायजा लिया गया। अंबाला, फरीदाबाद, रोहतक, गुरुग्राम और करनाल के मंडलायुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार ने बताया कि बजघेड़ा, खेड़वा (सोनीपत), रादौर रोड (यमुनानगर), ददलाना (पानीपत), बादशाहपुर (फरीदाबाद) और सोढ़ापुर (पानीपत) में कुल 132 एमएलडी क्षमता के छह एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इन सभी परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा गोहाना, सुनारिया (रोहतक), लाइन पार (बहादुरगढ़), हसनपुर (पलवल), धनवापुर और बहारमपुर (गुरुग्राम) में कुल 304 एमएलडी क्षमता के छह एसटीपी के उन्नयन का कार्य चल रहा है। कई अन्य एसटीपी परियोजनाएं भी टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए प्रस्तावित सीईटीपी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी सीईटीपी के लिए 10 अगस्त को टेंडर आमंत्रित किए गए थे और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 14 सितंबर है। मिर्जापुर में प्रस्तावित 25 एमएलडी सीईटीपी की डीपीआर और अनुमान की जांच की जा रही है, जबकि बादशाहपुर में 15 एमएलडी सीईटीपी के लिए 200.17 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया जा चुका है।
पानीपत में सैनी कॉलोनी के निकट पुराने औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेन नंबर-2 में औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रवाह को रोकने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने 14 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया, जिनमें से चार डिफॉल्टर इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
गांव स्तर पर सीवेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन के तहत अब तक पांच कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि सात कार्य प्रगति पर हैं। पिउंत, चंदौली, काछवा, निगदू और मंडौला में कार्य पूरे हो चुके हैं। सोनीपत के कटवाल में तीन-तालाब प्रणाली का कार्य जारी है।
राज्य में प्रतिदिन कुल 650 टन क्षमता वाले तीन नए या प्रस्तावित बायोगैस संयंत्रों पर भी काम किया जा रहा है। सोनीपत के राय-जखौली में 400 टीपीडी क्षमता का संयंत्र निर्माणाधीन है, जबकि फरीदाबाद के मोहना-बल्लभगढ़ में 100 टीपीडी क्षमता वाली परियोजना का अनुमान तैयार कर गैर-अनुसूचित मदों की स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए चिन्हित उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, धूल एवं कचरे से होने वाले प्रदूषण, पराली जलाने की रोकथाम तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
पुराने ट्रकों और बसों को बदलने में सहायता देने के लिए परिवर्तन योजना का पोर्टल अब संचालित हो चुका है। योजना के तहत पहली आवेदन 22 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई। बैठक में पात्र ट्रक और बस मालिकों को योजना के तहत पंजीकरण और भागीदारी के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
पराली प्रबंधन के लिए एक्स-सीटू और इन-सीटू, दोनों उपायों पर जोर दिया जा रहा है। कंप्रेस्ड बायोगैस तकनीक में हुई प्रगति को देखते हुए छोटे स्तर के बायोमास संयंत्रों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन उपायों को कृषि विभाग और हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी द्वारा लागू किया जाएगा।
वन विभाग को पौधरोपण के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने, पेड़ों के नीचे के क्षेत्रफल में वृद्धि करने तथा छोटे हरित क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री विनय प्रताप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






