चंडीगढ़, 9 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित GST परिषद की 57वीं बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा एक छोटा प्रदेश है। देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.3 प्रतिशत और कुल आबादी का करीब 2 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में है। इसके बावजूद सितंबर 2026 में हरियाणा से 10,097 करोड़ रुपये का सकल GST संग्रह हुआ। यह सभी राज्यों में पांचवां सबसे अधिक संग्रह है और देश के कुल घरेलू GST का 7 प्रतिशत से अधिक है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने तीन प्रस्ताव भी रखे। पहला प्रस्ताव GST के शुरुआती वर्षों यानी वित्त वर्ष 2017-18 से 2019-20 से संबंधित आदेशों के विरुद्ध अपील दायर करने की समय-सीमा में एक और एकमुश्त छूट देने से जुड़ा था।
उन्होंने कहा कि नवंबर 2023 में सीमित अवधि के लिए अपील दायर करने का एक अवसर दिया गया था। हरियाणा में ऐसे 646 मामले हैं, जिनमें केवल देरी के कारण अपीलें खारिज हो गईं। इन मामलों में 567 करोड़ 43 लाख रुपये की मांग शामिल है। इन आंकड़ों के पीछे ऐसे करदाता हैं, जो चाहते हैं कि उनके मामलों की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर हो। एक न्यायपूर्ण और संवेदनशील कर व्यवस्था को उनकी इस परेशानी पर विचार करना चाहिए।
पिछली अधिसूचना में ऐसे मामलों में अपील की अनुमति नहीं थी, जिनमें कर की राशि शामिल नहीं थी। हमारा सुझाव है कि प्रस्तावित छूट में कर, ब्याज और जुर्माने सहित सभी प्रकार की मांगों को शामिल किया जाए। ऐसे मामले भी इसके दायरे में आएं, जिनमें कर का कोई हिस्सा नहीं है और मांग केवल ब्याज या जुर्माने की है। इस सीमित छूट के लिए परिषद धारा 148 के तहत विशेष प्रक्रिया की सिफारिश करने पर विचार कर सकती है।
प्रशासनिक समन्वय की स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि दूसरा प्रस्ताव केंद्र और राज्य के GST अधिकारियों द्वारा एक साथ की जाने वाली प्रवर्तन कार्रवाई से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से संबंधित है। कई बार करदाताओं को एक ही या आपस में जुड़े विषय पर दोनों कर प्रशासन की ओर से समन, जांच, निरीक्षण और अन्य कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने में समय तथा संसाधन खर्च करने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक समन्वय के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। हरियाणा का प्रस्ताव है कि इसके लिए तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें केंद्र और राज्य, दोनों के वैध प्रवर्तन अधिकार सुरक्षित रहें।
इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुरक्षा से जुड़ा प्रस्ताव रखा
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पंजीकरण को पूर्वव्यापी तारीख से रद्द किए जाने के संबंध में भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून अधिकारियों को अपने द्वारा निर्धारित तारीख से पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देता है। इस अधिकार के साथ एक शर्त भी होनी चाहिए कि जिस अवधि के लिए वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति किए जाने के प्रमाण उपलब्ध हों, उस अवधि के लिए पंजीकरण रद्द नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह पंजीकरण रद्द होने से उन ईमानदार खरीदारों का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) भी खतरे में पड़ जाता है, जिन्होंने संबंधित अवधि में उस करदाता से वस्तुएं या सेवाएं खरीदी थीं।
नए सुधारों का किया स्वागत
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि GST परिषद जिन नए सुधारों पर विचार कर रही है, हरियाणा उनका स्वागत करता है। इनका उद्देश्य ऐसी कर व्यवस्था का नया दौर शुरू करना है, जो प्रणाली आधारित जोखिम आकलन पर आधारित हो और तकनीक की मदद से निर्णय लेने को बढ़ावा दे।
उन्होंने कहा कि पंजीकरण, संशोधन, निरस्तीकरण और रिफंड की प्रक्रिया में स्वचालन तथा तकनीक का उपयोग बढ़ाने के प्रस्ताव सराहनीय हैं। हरियाणा इनका समर्थन करता है। इससे कर अधिकारियों का समय और ऊर्जा बचेगी, जिसका उपयोग कर चोरी रोकने जैसे अधिक महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा सकेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान होगी।
मुख्यमंत्री ने ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के माध्यम से आपूर्ति करने वाले छोटे करदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाने और प्रणाली आधारित जोखिम विश्लेषण के आधार पर रिफंड देने की व्यवस्था का भी स्वागत किया।
पहली छमाही में GST राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2025-26 में हरियाणा का राज्य GST राजस्व, IGST सेटलमेंट में राज्य के हिस्से सहित, 39,743 करोड़ रुपये से बढ़कर 48,289 करोड़ रुपये हो गया। इसमें 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत था।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में राज्य का GST राजस्व बढ़कर 29,108 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 23,058 करोड़ रुपये था। इस प्रकार राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो राज्यों में दूसरी सबसे अधिक है। वहीं, राष्ट्रीय औसत वृद्धि 16 प्रतिशत रही।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय हरियाणा के उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेवा प्रदाताओं और ईमानदार करदाताओं की मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि राजस्व को और मजबूत बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने 30 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रदेश के कर राजस्व को सुदृढ़ करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था।
कम कर दरें और बढ़ता राजस्व, दोनों साथ-साथ चले
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने याद दिलाया कि एक वर्ष पहले GST परिषद की सिफारिश पर 22 सितंबर 2025 से देश में GST दरों का सरल ढांचा लागू किया गया था। मोटर वाहनों और ऑटो पार्ट्स, ट्रैक्टरों और कृषि मशीनों, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ा, खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा की वस्तुओं और दवाओं पर कर घटाया गया था। व्यक्तियों के जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा को भी कर से छूट दी गई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय राजस्व को लेकर चिंता होना स्वाभाविक था, लेकिन हरियाणा का एक वर्ष का अनुभव उत्साहजनक रहा है। जिन क्षेत्रों में कर दरें घटाई गईं, उनमें हरियाणा के करदाताओं का कारोबार एक वर्ष पहले की तुलना में 33 प्रतिशत बढ़ा है। ट्रैक्टरों और उनके पुर्जों के कारोबार में 52 प्रतिशत तथा ऑटो पार्ट्स में 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान राजस्व में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश में ऑटोमोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र है, इसलिए यह उपलब्धि प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखती है। करों में दी गई राहत का लाभ किसानों, मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों तक पहुंचा है। इसके परिणामस्वरूप बढ़ी हुई मांग के रूप में यह राहत अर्थव्यवस्था में वापस आई है।
विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में हरियाणा का पूर्ण सहयोग
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरियाणा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार राजस्व बढ़ाने और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि GST देश में सहकारी संघवाद का एक मजबूत उदाहरण है। इसमें किए जाने वाले ऐसे सुधार, जो ईमानदार करदाताओं के लिए व्यवस्था को सरल बनाएं और राजस्व को सुरक्षित रखें, देश को विकसित भारत के संकल्प के और करीब ले जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने GST परिषद को हरियाणा की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्रीय वित्त मंत्री के नेतृत्व में हरियाणा केंद्र तथा सभी राज्यों के साथ मिलकर विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।





