नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026 (जगजीत सिंह): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पढ़ाई, रिसर्च और रोजमर्रा के कामों को आसान बना दिया है, लेकिन इस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसान की स्वतंत्र रूप से सोचने और मुश्किल सवालों को हल करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले के शोधकर्ता ब्रायन क्रिश्चियन और उनकी टीम से जुड़ी एक स्टडी ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।
ए.आई. की मदद हटते ही घटा प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने अलग-अलग प्रयोगों के जरिए यह समझने की कोशिश की कि ए.आई. की सहायता लेने से लोगों के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है। गणित के सवालों और SAT रीडिंग टेस्ट जैसे कार्यों में ए.आई. की मदद लेने वाले प्रतिभागियों का प्रदर्शन शुरुआती चरण में बेहतर रहा। हालांकि, जब उनसे ए.आई. की सहायता हटा दी गई, तो कुछ प्रतिभागियों की सटीकता और सवालों को हल करने में निरंतरता प्रभावित हुई।
इन नतीजों से संकेत मिलता है कि यदि लोग हर समस्या का समाधान ए.आई. से लेने लगें, तो स्वतंत्र रूप से प्रयास करने की आदत कमजोर पड़ सकती है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ए.आई. का थोड़े समय इस्तेमाल करने से हर व्यक्ति की सोचने की क्षमता घट जाती है।
खुद प्रयास करके सीखना क्यों जरूरी?
सीखने की प्रक्रिया में किसी कठिन सवाल पर विचार करना, गलतियों से सीखना और समाधान तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना अहम भूमिका निभाता है। जब ए.आई. तुरंत उत्तर उपलब्ध करा देता है, तो व्यक्ति इस प्रक्रिया को छोड़कर सीधे नतीजे तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों की चिंता यह है कि ऐसा बार-बार होने पर लोग समस्याओं को खुद समझने और उनका समाधान खोजने के बजाय तकनीक पर अधिक निर्भर हो सकते हैं। इसका असर पढ़ाई के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध और जटिल निर्णय लेने जैसे क्षेत्रों में भी पड़ सकता है।
ए.आई. को शिक्षक बनाना होगा, विकल्प नहीं
इस चुनौती से निपटने के लिए ए.आई. का इस्तेमाल केवल उत्तर प्राप्त करने तक सीमित रखने के बजाय सीखने के साधन के रूप में करना उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी सवाल का सीधा जवाब मांगने के बजाय उसके समाधान के संकेत, चरणबद्ध व्याख्या और अभ्यास के लिए नए सवाल मांगे जा सकते हैं।
ए.आई. कंपनियां भी ऐसे टूल विकसित कर सकती हैं, जो उपयोगकर्ताओं को तैयार जवाब देने के बजाय खुद सोचने, तर्क करने और समस्याओं को हल करने के लिए प्रोत्साहित करें।
ए.आई. अपने आप में सीखने की क्षमता के लिए खतरा नहीं है। असली चुनौती इसका इस्तेमाल करने के तरीके में है। यदि तकनीक इंसान की सोच को मजबूत करने के बजाय उसकी जगह लेने लगे, तो सुविधा के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से सीखने की आदत पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।






