अस्ताना, 31 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय पहलवान मनीषा भंवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। शुक्रवार को हुए महिलाओं के 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की पहलवान अबीगेल नेते को 8-6 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस जीत के साथ मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। खास बात यह रही कि फाइनल मुकाबले में वह एक समय 0-6 से पीछे चल रही थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। मनीषा इस विश्व खिताब को जीतने वाली दूसरी भारतीय पहलवान भी बन गई हैं। इससे पहले महान पहलवान सुशील कुमार ने वर्ष 2010 में 66 किलोग्राम भार वर्ग में विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।
6 अंकों से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी
फाइनल मुकाबले की शुरुआत अमेरिकी पहलवान अबीगेल नेते ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने मनीषा पर दबाव बनाते हुए शुरुआती दौर में 6-0 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद मुकाबला मनीषा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया।
हालांकि, दूसरे दौर में मनीषा ने अपनी रणनीति बदलते हुए शानदार वापसी की। उन्होंने विरोधी पहलवान के हमलों का मजबूती से बचाव किया और मौका मिलते ही टेकडाउन के जरिए अंक हासिल किए। लगातार बेहतरीन दांव लगाते हुए उन्होंने स्कोर 6-6 से बराबर कर दिया। इसके बाद मनीषा ने दो और अंक हासिल कर 8-6 की बढ़त बना ली। मुकाबले के अंतिम 27 सेकंड में अबीगेल ने स्कोर बराबर करने की पूरी कोशिश की, लेकिन मनीषा ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।जैसे ही फाइनल मुकाबले की सीटी बजी, मनीषा ने जीत की खुशी में कुश्ती के मैट को चूमकर अपने इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया।
भारतीय महिला कुश्ती के लिए भी ऐतिहासिक चैंपियनशिप
यह विश्व चैंपियनशिप भारतीय महिला कुश्ती टीम के लिए भी बेहद खास रही, क्योंकि पहली बार भारत की तीन महिला पहलवानों ने विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाई। मनीषा भंवाला ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि गुरुवार को नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम भार वर्ग और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में हार के बाद रजत पदक हासिल किए।
मनीषा की यह जीत न केवल भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि देश की युवा महिला खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। छह अंकों से पिछड़ने के बाद वापसी कर विश्व चैंपियन बनने वाली मनीषा ने साबित कर दिया कि हौसले और दृढ़ संकल्प के साथ बड़ी से बड़ी चुनौती को भी जीत में बदला जा सकता है।






