Wednesday, November 4, 2026
HomeNationalमहंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव...

महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव बरकरार

नई दिल्ली, 4 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): आने वाले समय में भारतीय रुपये पर दबाव बना रह सकता है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका मूल्य 94.75 से 95.75 के बीच रहने की संभावना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रुपये की आगे की चाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर महीने के दौरान महंगे कच्चे तेल, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की ओर से लगातार पूंजी निकासी के कारण रुपये को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। महीने की शुरुआत में रुपया तेजी से कमजोर हुआ और अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया।

रुपये की गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हस्तक्षेप करते हुए तेल कंपनियों के लिए अलग डॉलर सुविधा सहित कई कदम उठाए। इसके साथ ही सट्टेबाजी वाले कारोबार पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया गया। इन उपायों के बाद रुपये में फिर मजबूती आई और इसके मूल्य में दो प्रतिशत से अधिक का सुधार दर्ज किया गया।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, डॉलर की मजबूती, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार पूंजी निकासी के कारण रुपये पर दबाव दोबारा बढ़ गया। इसके बावजूद रुपया अक्टूबर का महीना 0.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद करने में सफल रहा।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में रुपये की दिशा आर्थिक बुनियादी कारकों के बजाय बाजार के रुझान और निवेशकों के भरोसे पर अधिक निर्भर कर सकती है। रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को कुछ सहारा मिला है, लेकिन यह स्थिरता तभी कायम रहने की उम्मीद है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई नया बड़ा झटका न लगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments