पटियाला, 6 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) ने पीसीएस (मेन्स) 2025 के परिणामों को लेकर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पीपीएससी के चेयरमैन मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विनायक सैनी ने कहा कि मेन्स परीक्षा के परिणामों को लेकर हाल ही में लगाए गए आरोप आंकड़ों के पैटर्न की गलत व्याख्या पर आधारित प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रवार आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण से उठाई गई आशंकाओं का स्पष्ट जवाब मिल जाता है।
उन्होंने आज शाम यहां बताया कि आंकड़ों की गलत व्याख्या की गई है। संदर्भ के तौर पर प्रस्तुत किए गए आंकड़े भले ही संख्यात्मक रूप से सही हों, लेकिन उन्हें अनियमितता के प्रमाण के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में ये सामान्य सांख्यिकीय निष्कर्ष हैं।
परीक्षा के वितरण और दायरे के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह परीक्षा पटियाला के 12 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। विभिन्न केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या 118 से 553 के बीच थी और कुल 3,959 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 751 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, जो अनुपस्थित उम्मीदवारों को छोड़कर लगभग 19 प्रतिशत की समग्र सफलता दर है।
सफलता दर के संदर्भ में चेयरमैन ने कहा कि यह दावा गलत है कि सफल उम्मीदवारों में से 24 प्रतिशत एक ही परीक्षा केंद्र से संबंधित हैं। किसी एक केंद्र से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की अधिकतम संख्या 751 में से 106 है, जो कुल संख्या का 14.1 प्रतिशत बनती है। इस केंद्र पर परीक्षार्थियों की संख्या भी सबसे अधिक थी (496 उम्मीदवार), जो सभी 12 केंद्रों में दूसरी सबसे बड़ी संख्या थी। इसलिए इस केंद्र से सफल उम्मीदवारों की संख्या अधिक होना स्वाभाविक है।
कक्षाओं में भिन्नता के संबंध में चेयरमैन सैनी ने कहा कि कुल 179 कक्षाओं में से 751 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस हिसाब से प्रति कक्षा औसतन 4.2 उम्मीदवारों के सफल होने की अपेक्षा की जा सकती है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों में एक ही कक्षा से क्रमशः 11, 10 और 10 उम्मीदवार सफल हुए हैं। लगभग 19 प्रतिशत की समग्र सफलता दर को देखते हुए ये आंकड़े सामान्य सांख्यिकीय उतार-चढ़ाव के दायरे में ही आते हैं। वर्ष 2020 की मेन्स परीक्षा में भी इसी तरह की भिन्नता देखने को मिली थी। हालांकि, उस समय केवल दो केंद्रों में 960 उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए आवंटित किया गया था, फिर भी कुछ कक्षाओं से 9 उम्मीदवार सफल हुए थे।
लगातार रोल नंबर वाले उम्मीदवारों के सफल होने के मुद्दे पर चेयरमैन ने कहा कि वर्ष 2018, 2020 और 2025 की पंजाब पीसीएस मेन्स परीक्षाओं में सफलता दर लगभग 19 प्रतिशत रही है। ऐसे में लगातार रोल नंबर वाले उम्मीदवारों का एक साथ सफल होना सांख्यिकीय रूप से असामान्य नहीं है। वर्ष 2018 की सूची में शॉर्टलिस्ट किए गए 153 उम्मीदवारों में लगातार रोल नंबरों वाले 26 समूह सामने आए थे। वर्ष 2020 में 177 उम्मीदवारों में ऐसे 28 समूह थे, जबकि वर्ष 2025 में 751 उम्मीदवारों में लगातार रोल नंबरों वाले 118 समूह पाए गए हैं।
चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनुपस्थित उम्मीदवार को योग्य घोषित नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, सभी परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक के साथ-साथ मैनुअल उपस्थिति भी दर्ज की गई थी। परीक्षा केंद्रों के चयन के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक, प्रबंधकीय और सुरक्षा कारणों से परीक्षा केंद्र पटियाला और इसके आसपास निर्धारित किए गए थे, ताकि परीक्षा का आयोजन सुरक्षित, एकसमान व्यवस्था और प्रभावी निगरानी के तहत किया जा सके। उन्होंने कहा कि पीपीएससी द्वारा अब तक आयोजित सभी सिविल सेवा मुख्य परीक्षाओं में यही स्थापित व्यवस्था रही है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र वाले निर्वाचन क्षेत्र के संबंध में यह समझना जरूरी है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। ऐसे में स्वाभाविक है कि जिस निर्वाचन क्षेत्र में परीक्षा केंद्र स्थित हो, वहां का मौजूदा विधायक सत्ताधारी दल से संबंधित हो सकता है। हालांकि, इसका परीक्षा के आयोजन अथवा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
साक्षात्कार के लिए तीन गुना उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के नियम के संबंध में चेयरमैन ने कहा कि विज्ञापन और निर्धारित नियमों के अनुसार पीपीएससी ने प्रत्येक श्रेणी में उपलब्ध योग्य उम्मीदवारों की संख्या के तीन गुना उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया है।
पीपीएससी के चेयरमैन मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विनायक सैनी ने दोहराया कि सफल उम्मीदवारों के एक ही केंद्र या कक्षा में समूह के रूप में सामने आने संबंधी दावे अनुमानित ‘रैंडम वैरिएशन’ अर्थात सामान्य सांख्यिकीय उतार-चढ़ाव की सीमा के भीतर हैं। इसके अतिरिक्त, पीपीएससी ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल लागू किए थे। इनमें परीक्षा केंद्रों के प्रवेश द्वारों और कंट्रोल रूम में सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक उपस्थिति तथा प्रत्येक कक्षा में जैमर लगाना शामिल था, ताकि परीक्षा की पवित्रता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।






