Wednesday, August 26, 2026
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यमुना पुनर्जीवन अभियान को गति: हरियाणा में 423 एमएलडी नई सीवेज शोधन क्षमता होगी विकसित, 9 बायोगैस संयंत्र भी लगेंगे

चंडीगढ़, 9 जुलाई 2026:
हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत राज्य में प्रतिदिन 580 मिलियन लीटर (एमएलडी) अतिरिक्त सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन क्षमता विकसित की जाएगी। साथ ही 1,455 टन प्रतिदिन जैविक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 9 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना में गिरने वाले प्रदूषकों को कम करना, जल गुणवत्ता में सुधार लाना और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा गुरुवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने यमुना प्रदूषण नियंत्रण उपायों की उच्च स्तरीय बैठक में की। उन्होंने सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं में तेजी लाई जाए, लंबित बाधाओं का शीघ्र समाधान किया जाए तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि योजना के तहत 423.5 एमएलडी क्षमता वाले 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 828.88 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 156.5 एमएलडी क्षमता वाले 9 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बनाए जाएंगे। वहीं, 30-30 एमएलडी क्षमता के दो सीईटीपी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

अधिकारियों ने बताया कि पानीपत के मतलोडा में 3 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 31 जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं गुरुग्राम के बजघेड़ा में 2 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का 85 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, जिसे 31 अगस्त 2026 तक चालू करने की योजना है।

मुख्य सचिव ने 423.5 एमएलडी क्षमता वाले प्रस्तावित एसटीपी कार्यक्रम की भी समीक्षा की। इसके तहत गुरुग्राम के धनवापुर, बेहरामपुर, नौरंगपुर और सेक्टर-107, फरीदाबाद के मिर्जापुर और सूरजकुंड, सोनीपत, कुंडली तथा पानीपत के समालखा में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे।

बैठक में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े 9 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ये संयंत्र फरीदाबाद के प्रतापगढ़ और मिर्जापुर, गुरुग्राम के बादशाहपुर तथा सेक्टर-18, 34 और 37, सोनीपत के कुंडली और पानीपत के सेक्टर-29 सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे।

अधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), टेंडर प्रक्रिया और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की स्थिति से भी मुख्य सचिव को अवगत कराया।

बैठक में बताया गया कि सोनीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, रोहतक और यमुनानगर में 9 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल प्रसंस्करण क्षमता 1,455 टन प्रतिदिन होगी। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन पंचायती राज विभाग, हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरेडा), गेल और बीपीसीएल द्वारा किया जाएगा। इनका उद्देश्य जैविक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उत्पादन करना है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि यमुना नदी का पुनर्जीवन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने, परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा सभी स्वीकृत एवं प्रस्तावित परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से हरियाणा की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और मजबूत होगी तथा यमुना नदी के जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

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