चंडीगढ़, 21 जुलाई 2026: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि शोधन किए गए (ट्रीटेड) पानी का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए तो भूजल और पेयजल स्रोतों पर दबाव कम होगा तथा उद्योगों, ऊर्जा क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और कृषि के लिए दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री ने सोमवार देर शाम रीयूज ऑफ ट्रीटेड वेस्टवाटर (टीडब्ल्यूडब्ल्यू) नीति को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से निर्धारित मानकों के अनुरूप शोधन किया गया पानी निकले और उसका अधिकतम पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ट्रीटेड पानी किसी भी स्थिति में व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसा मजबूत और सुव्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया जाए, जिससे ट्रीटेड पानी को थर्मल पावर प्लांटों, औद्योगिक क्षेत्रों, ग्रीन बेल्ट, पार्कों, वृक्षारोपण और कृषि कार्यों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सबसे पहले थर्मल पावर प्लांटों में ताजे पानी के स्थान पर ट्रीटेड पानी के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने ट्रीटेड वेस्टवाटर के पुनः उपयोग के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की है। पहले चरण में 21 जिलों के 35 एसटीपी को शामिल करते हुए 500 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई, जिसे नाबार्ड की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 19 एसटीपी का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 8 पर कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना से लगभग 40 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में 57 एसटीपी को शामिल किया गया है। वर्तमान में हरियाणा में 207 एसटीपी और सीईटीपी कार्यरत हैं तथा शेष संयंत्रों को भी चरणबद्ध तरीके से इस योजना से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य विजन-2047 के तहत मार्च 2031 तक राज्य में 100 प्रतिशत ट्रीटेड वेस्टवाटर का पुनः उपयोग सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी एसटीपी और सीईटीपी की विस्तृत मैपिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संयंत्र की क्षमता, प्रतिदिन उपलब्ध ट्रीटेड पानी, संभावित उपयोग तथा आसपास के क्षेत्रों तक इसकी आपूर्ति की विस्तृत योजना तैयार की जाए। साथ ही संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना बनाकर इसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 678 आवासीय सोसायटी कॉलोनियों में स्थापित एसटीपी की भी विशेष जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वहां से निकलने वाले ट्रीटेड पानी का उपयोग ग्रीन बेल्ट, पार्कों और वृक्षारोपण में हो। यदि वहां इसकी आवश्यकता नहीं है तो पाइपलाइन अथवा अन्य नेटवर्क के माध्यम से इसे कृषि या अन्य जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री ने एसटीपी के संचालन में बिजली खर्च कम करने के लिए कुसुम योजना के तहत अधिक से अधिक संयंत्रों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी एसटीपी 24 घंटे संचालित रहें और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी एसटीपी और सीईटीपी की विस्तृत बुकलेट तैयार की जाएगी, जिसमें प्रत्येक संयंत्र का पता, क्षमता, प्रतिदिन शोधन किए जाने वाले पानी की मात्रा, उपलब्ध ट्रीटेड पानी, संबंधित अधिकारियों के संपर्क विवरण तथा वर्तमान एवं प्रस्तावित उपयोग की पूरी जानकारी शामिल होगी। इससे भविष्य की योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में सुविधा मिलेगी।






