चंडीगढ़, 24 जुलाई 2026: हरियाणा ने टीबी उन्मूलन अभियान में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए टीबी मुक्त भारत ऐप पर 35,229 पंजीकरण के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही राज्य में टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) का कवरेज बढ़कर 49 प्रतिशत, एनएएटी आधारित मॉलिक्यूलर जांच का कवरेज 67 प्रतिशत तथा पात्र मरीजों के लिए डिफरेंशिएटेड टीबी केयर का कवरेज 71 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
इन उपलब्धियों की जानकारी शुक्रवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित 100-दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा बैठक में दी गई।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 24 मार्च 2026 को अभियान शुरू होने के बाद हरियाणा ने टीबी नियंत्रण के लगभग सभी प्रमुख मानकों पर लगातार सुधार दर्ज किया है। राज्य ने टीबी मुक्त भारत ऐप पर पंजीकरण के मामले में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के साथ-साथ 22,888 स्वयंसेवकों और 2,067 निक्षय मित्रों को अभियान से जोड़कर जनभागीदारी को भी मजबूत किया है। 1 जनवरी से 23 जुलाई 2026 के बीच पंजीकृत 51,526 टीबी मरीजों में से 8,939 मरीजों ने टीबी मुक्त भारत ऐप पर पंजीकरण कराया है, जिससे उनके उपचार और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दवा-संवेदनशील फेफड़ों की टीबी से पीड़ित मरीजों के 44,574 पात्र पारिवारिक संपर्कों में से 21,697 लोगों (49 प्रतिशत) को रोकथाम उपचार प्रदान किया जा चुका है, जबकि अभियान शुरू होने के समय यह कवरेज केवल 31 प्रतिशत था। राज्य के 14 जिले इस मामले में 50 प्रतिशत से अधिक कवरेज प्राप्त कर चुके हैं। पिछड़े जिलों में प्रदर्शन सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 60-दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है।
अधिकारियों ने बताया कि सक्रिय मरीज खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) के तहत अब तक 4,711 स्क्रीनिंग शिविरों के माध्यम से 5,31,178 संवेदनशील व्यक्तियों की जांच की जा चुकी है। इनमें से 2,814 शिविर उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों में लगाए गए। इस दौरान 2,57,081 छाती के एक्स-रे किए गए। जांच सुविधाओं को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने हरियाणा को 200 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें आवंटित की हैं, जिनमें से 36 मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं तथा शेष 164 मशीनें शीघ्र स्थापित की जाएंगी।
राज्य की जांच क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अभियान के दौरान अब तक 1.50 लाख एनएएटी जांचें की जा चुकी हैं, जिससे मॉलिक्यूलर जांच का कवरेज 42 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया है। वहीं 31,849 पात्र टीबी मरीजों में से 22,571 मरीजों (71 प्रतिशत) को डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के दायरे में लाया गया है। इस मानक पर 20 जिले 50 प्रतिशत से अधिक कवरेज प्राप्त कर चुके हैं और अब राज्य का कोई भी जिला रेड कैटेगरी में नहीं है। विभाग का लक्ष्य अगस्त 2026 तक सभी पात्र मरीजों के लिए 100 प्रतिशत प्रारंभिक एनएएटी जांच सुनिश्चित करना है।
बैठक में निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 2025 घटक के तहत 55,348 लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है, जबकि 2026 घटक के तहत अब तक 9,000 लाभार्थियों को लाभ मिला है। इसके अलावा 23,962 सहमति देने वाले टीबी मरीजों को निक्षय मित्र पहल के माध्यम से पोषण किट उपलब्ध कराई गई हैं। राज्य सरकार पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों के सहयोग से पोषण सहायता का दायरा और बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।






