13अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिन्हित करने के लिए एक सरल और निर्धारित डिजिटल प्रणाली को मंजूरी दे दी है। इससे पूरे राज्य में प्राइम खसरा निर्धारित करने की प्रक्रिया एक समान तरीके से लागू की जा सकेगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल के साथ-साथ इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी मंजूरी प्रदान की है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल को प्राइम खसरों की पहचान और चिन्हित करने के लिए विकसित किया गया है। इसके तहत अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद प्राइम खसरे का चयन एवं निर्धारण कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना तथा भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल प्रबंधन को मजबूत करना है। इससे अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने और उसके निर्धारण के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध होगी। इससे अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके अपनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
लागू करने के लिए एस.ओ.पी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंजूर
सभी जिलों में इस मॉड्यूल का एक समान उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी है। इसमें पूरी प्रक्रिया और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। अधिकारियों की सुविधा के लिए उपयोगकर्ता पुस्तिका के संस्करण 1.0 को भी मंजूरी दी गई है। इसमें मॉड्यूल के संचालन के लिए सरल चरणबद्ध निर्देश और स्क्रीनशॉट दिए गए हैं। इन दस्तावेजों को विभागीय स्तर पर जांच के बाद तैयार किया गया है। मॉड्यूल का परीक्षण भी किया जा चुका है। इससे संबंधित परीक्षण मामलों और सुरक्षा प्रमाण-पत्र को भी दस्तावेजों के साथ शामिल किया गया है।
राजस्व अधिकारियों तक पहुंचाए जाएंगे दिशा-निर्देश
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि स्वीकृत एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, उप-मंडल अधिकारियों (नागरिक), तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भेजी जाएगी। इससे अधिकारियों को मॉड्यूल के उपयोग और इसके तहत की जाने वाली कार्रवाई के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा, ताकि अधिकारी आवश्यकता पड़ने पर इन्हें देख सकें और इनका उपयोग प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिए भी किया जा सके।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल को मंजूरी मिलना हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत प्राइम खसरा की पहचान के लिए एक निर्धारित और पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें रिकॉर्ड का सत्यापन और आवश्यक दस्तावेज भी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।






