Thursday, August 27, 2026
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राज्य सरकार एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी दे रही है बढ़ावा : आरती सिंह राव

हरियाणा , 19 अगस्त,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि मई 2023 में लागू की गई ‘आयुष मेडिकल प्रतिपूर्ति नीति’ का लाभ अब लाभार्थियों तक सीधे पहुंच रहा है। इस नीति के तहत यदि कोई पात्र व्यक्ति पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से अपना इलाज करवाता है, तो उसके चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना और कर्मचारियों को स्वास्थ्य देखभाल के अधिक विकल्प उपलब्ध करवाना है। इसके तहत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) जैसी पद्धतियों से करवाया गया उपचार कवर किया जाता है। सरकार की इस पहल से उन मरीजों को राहत मिल रही है, जो पुरानी बीमारियों के उपचार के लिए एलोपैथी की बजाय पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए अस्पतालों की एम्पैनलमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयुष मेडिकल प्रतिपूर्ति नीति के तहत अब तक आयुष विभाग द्वारा 18 निजी और विशेषज्ञ अस्पतालों को सूचीबद्ध (एम्पैनल्ड) किया जा चुका है। इन सूचीबद्ध अस्पतालों में मरीज आयुष पद्धतियों से उपचार करवा सकते हैं और बाद में नीति के नियमों के अनुसार अपने खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।

राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस नेटवर्क को और मजबूत करना है, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले कर्मचारियों और पेंशनरों को भी नजदीकी आयुष केंद्रों का लाभ मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस नीति से न केवल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि सरकारी सेवा से जुड़े लाखों परिवारों पर अचानक आने वाले चिकित्सकीय आर्थिक बोझ को भी कम करने में मदद मिल रही है।

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