Sunday, October 11, 2026
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टिकाऊ कपास उत्पादन से फसल विविधीकरण और जल संसाधनों के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

हरियाणा, 02 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रदेश में ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है, जिनसे कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। टिकाऊ कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संसाधनों का संरक्षण आज की कृषि की जरूरत ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित कृषि व्यवस्था का रोडमैप भी है।

मुख्यमंत्री वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेले (रबी) का उद्घाटन करने के बाद किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर कृषि प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और विभिन्न स्टॉलों पर किसानों के लिए प्रदर्शित नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि उपकरणों और अन्य कृषि उत्पादों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि मेला किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। यहां किसानों को उन्नत रबी बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, मशीनरी, फसल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध की जानकारी एक ही स्थान पर मिलती है। उन्होंने मेले में प्रदर्शित नरमा/कपास चुनाई मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ कपास की चुनाई करती है और हाथ से चुनाई की तुलना में इसमें समय भी आधा लगता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार कपास चुनाई और गन्ने की छिलाई जैसी मशीनों तथा इस प्रकार की अन्य तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, ताकि श्रमिकों की कमी के कारण कपास और गन्ने का बुवाई क्षेत्र कम न हो।

लगातार कपास उत्पादन और बदलती जलवायु के अनुकूल तकनीक विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास हरियाणा की महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। यह फसल विशेष रूप से सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के क्षेत्रों में लाखों किसान परिवारों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे हम गर्व से ‘सफेद सोना’ कहते हैं। हमारी कृषि विश्वविद्यालय और सिरसा स्थित कपास अनुसंधान केंद्र ने नई किस्मों, बेहतर बीज और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आज कपास की खेती के सामने नई चुनौतियां भी हैं। मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। इसलिए हमें ऐसी कृषि तकनीक और बीज किस्मों पर तेजी से काम करना होगा, जो बदलते मौसम और कीटों का बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास की खेती के लिए ऐसे उपायों की जानकारी देने के उद्देश्य से 257 कपास किसान खेत पाठशालाएं आयोजित की गई हैं। इनमें 7 हजार से अधिक किसानों को कपास के खेत में ही बुवाई से लेकर चुनाई तक हानिकारक कीटों की पहचान और उनके बेहतर प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया, ताकि अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इसके अलावा 167 किसान मेलों में कम लागत पर कपास उत्पादन करके अधिक मुनाफा कमाने के उपाय बताए गए।

उन्होंने कहा कि इस मेले के विषय का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू फसल विविधीकरण है। पानी है तो खेती है, गांव है और जीवन है। हरियाणा ने देश की खाद्य सुरक्षा में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन हमें अपने भूजल की भी चिंता करनी होगी। हमें ऐसी कृषि की ओर बढ़ना होगा, जिसमें कम पानी में अधिक और बेहतर उत्पादन हो। लगातार एक ही प्रकार की फसलें उगाने से मिट्टी की सेहत प्रभावित होती है। पारंपरिक रूप से गेहूं और धान की खेती में पानी की खपत अधिक होती है, जबकि पूरी दुनिया जल संकट का सामना कर रही है। इसलिए हमें दलहन, तिलहन और कम पानी में उगने वाली फसलों को अपनाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना चलाई हुई है। इस योजना के तहत वैकल्पिक फसल लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक 2 लाख 34 हजार एकड़ में धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर 1 लाख 59 हजार किसानों को 166 करोड़ 34 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य कम पानी में अधिक सिंचाई करना है। इसके लिए वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। माइक्रो इरिगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। किसानों को तालाब बनाने के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

पानी की बचत के साथ-साथ इसके पुनः उपयोग के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 27 योजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें से 20 पूरी हो चुकी हैं। इनसे सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होगा, नहरों पर दबाव कम होगा और भूजल का दोहन भी घटेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल सुरक्षा के साथ-साथ मिट्टी की सेहत की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच कर 1 करोड़ 6 लाख सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। प्रदेश में मिट्टी के नमूनों की जांच के लिए 17 नई मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभिन्न मंडियों में भी 54 नई लघु मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं खोली गई हैं। इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में 240 लघु मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल भी शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर पंजीकरण करवाकर कोई भी किसान अपनी मिट्टी की जांच करवा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन, सेंसर तकनीक, मौसम की डिजिटल जानकारी, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और एग्री स्टार्टअप अब कृषि का हिस्सा बन रहे हैं।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार किसानों के साथ बीज से बाजार तक खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान हित में अनेक ठोस फैसले लिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी किए जाने पर धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि आज प्रदेश में किसानों की सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है।

उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को 23 किस्तों में 7 हजार 881 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। इसी तरह पिछले 12 सीजन में 12 लाख किसानों के खातों में फसल खरीद के 1 लाख 85 हजार करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में भी 16 हजार 160 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण करवाया है। इसमें से अब तक 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23 हजार 930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है।

प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के लिए कुरुक्षेत्र-गुरुकुल, जींद-हामेटी, सिरसा-मंगियाणा और करनाल-घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं। अब तक 12 हजार 188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि हैफेड (HAFED) के माध्यम से प्राकृतिक तरीके से तैयार की गई फसलों की खरीद की जाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि हमारे पूर्वजों ने हमें जो ताकत दी है, हमें भी प्राकृतिक खेती के माध्यम से वही ताकत आने वाली पीढ़ियों को देनी होगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 से एक एकड़ तक के किसान को देसी गाय पर मिलने वाली सब्सिडी 30 हजार रुपये कर दी गई है। कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए 4 ड्रम खरीदने हेतु प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ के क्लस्टर में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ के नाम से प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। इसमें यदि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होगा तो उसकी भरपाई हरियाणा सरकार करेगी।

उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाने के लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अब तक 1 लाख 95 हजार 653 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।

इसी प्रकार फसल अवशेष (पराली) प्रबंधन के लिए उपकरणों की खरीद पर व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 1 लाख 11 हजार फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण और कस्टम हायरिंग सेंटरों पर 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर 6 हजार 794 केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन पर अब तक 1 हजार 17 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है।

पराली के उचित प्रबंधन और गांठें बनाने के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। 10 लाख किसानों को 909 करोड़ रुपये की राशि सब्सिडी के रूप में दी जा चुकी है। सब्जियों और फलों के लिए ‘भावांतर भरपाई योजना’ में 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए गए हैं। अब तक 46 हजार किसानों को 247 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया है।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कर रही प्रभावी योजनाओं का क्रियान्वयन: कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। राज्य सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वे फसल विविधीकरण के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ तकनीक और सुविधाएं भी उपलब्ध करवाएं।

उन्होंने कहा कि किसान भी इस बात को प्राथमिकता दें कि उनके खेत की मिट्टी, हवा और पानी खराब न हो। किसानों को आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर कृषि को लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए आगे आना चाहिए।

कपास की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि विविधता पर जोर: प्रो. बी.आर. कंबोज

कुलपति प्रो. बी.आर. कंबोज ने कहा कि हरियाणा में कपास की खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि कपास के क्षेत्र में विविधता को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

उन्होंने देसी कपास के क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देसी कपास की अच्छी किस्मों से चुनाई की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन और रेशे की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘एचएयू बीटी-12’ और ‘एचएयू बीटी-13’ कपास की किस्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन किस्मों में अन्य किस्मों की तुलना में बेहतर उत्पादन क्षमता है। रेतीली भूमि वाले क्षेत्रों में ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन अपनाने से पानी और खाद का बेहतर उपयोग कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

कुलपति ने कहा कि कपास लंबी अवधि की फसल होने के कारण इसके साथ मूंग की अंतरफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग) करके किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सरसों, मूंग, बाजरा और अन्य फसलों की उन्नत किस्मों एवं तकनीकों पर भी काम कर रहा है। सरसों की नई हाइब्रिड किस्म 2101 को किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की अन्य उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में हर वर्ष लगभग 25,000 क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए बीजों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के किसानों को विश्वविद्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का धन्यवाद करते हुए नलवा के विधायक श्री रणधीर पनिहार ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों और शोध कार्यों से किसान उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं। किसान फसल अवशेष प्रबंधन, फसल विविधता और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं।

प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और फूड प्रोसेसिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले 45 किसान सम्मानित

मुख्यमंत्री ने कृषि मेले में प्रदेशभर से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधता, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी पालन और वर्मी कम्पोस्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 30 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित किसानों को प्रशंसा पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का किया उद्घाटन

हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में ‘दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र’ का भी उद्घाटन किया।

लगभग 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों, शोध और प्रशिक्षण से जोड़ना है। यह केंद्र प्रदेश के किसानों को रसायन मुक्त खेती अपनाने, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक फसलों के उत्पादन में मार्गदर्शन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर सिंह गंगवा, नलवा विधायक श्री रणधीर पनिहार, हिसार विधायक श्रीमती सावित्री जिंदल, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, लुवास (LUVAS) के कुलपति विनोद कुमार वर्मा, एमएचयू (MHU) करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री, मेयर प्रवीण पोपली सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी और किसान उपस्थित रहे।

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