पटियाला, 25 अक्टूबर, 2026 (जगप्रीत महाजन): राष्ट्रीय काव्य सागर की ओर से 23 अक्टूबर को नवरात्र और दशहरा के अवसर पर समर्पित कवि दरबार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश में रह रहे 20 भारतीयों ने भाग लिया। सभा की अध्यक्ष आशा शर्मा ने सभी अतिथियों और कवियों का दिल से स्वागत किया।
सभा की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि समूह के सभी सदस्यों की मेहनत और लगन के कारण यह साहित्यिक सभा देश-विदेश में अपनी अच्छी पहचान बना चुकी है और बड़ी संख्या में सदस्य इससे जुड़ चुके हैं। इस सभा की ओर से अब सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और नए कवियों को प्रोत्साहित करने के कार्य भी किए जा रहे हैं।
आशा शर्मा ने बताया कि वह हर वर्ष किसी स्कूल के दो होनहार बच्चों को पढ़ाई के लिए गोद लेती हैं और उन्हें प्रगतिशील विचारों के साथ-साथ यथासंभव आर्थिक सहायता देकर अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक कई विद्यार्थी व्याख्याता, वकील और बैंक कर्मचारी बन चुके हैं। अब विद्यार्थियों को शिक्षक बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय काव्य सागर की महासचिव डॉ. उमा शर्मा ने शानदार ढंग से मंच संचालन किया और सभी की सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम में डॉ. गजराज सिंह, डॉ. उमा शर्मा, आशा शर्मा, इंदू पॉल, जागृति गौड़, सरिता नौरिया, डॉ. सुदेश चुग, रुपिंदर संधू, डॉ. पूनम ग्रोवर, सुखदेव सिंह, कुलविंदर सिंह गाखल, गुरदर्शन सिंह गुसील, कनीज मंजूर, अमरजीत सिद्धू, परमजीत जैसवाल, उमा नसरा, पोली बराड़, डॉ. कमलप्रीत, स्नेहा विज और सुखविंदर सिंह ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान कन्या पूजन की महत्ता पर सभी प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में देश में कन्या पूजन के वास्तविक महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। एक ओर कन्याओं की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर इसी देश में बच्चियों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं भी होती हैं। इस विरोधाभास पर वक्ताओं ने रोष व्यक्त किया और समाज में महिलाओं तथा बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

डॉ. गजराज सिंह ने एक प्रगतिशील देश की झलक प्रस्तुत की। इंदू पॉल ने कन्या पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बेटियों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताई। डॉ. पूनम ग्रोवर ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को वास्तविक जीवन में अपनाने पर अपने विचार रखे। उमा शर्मा ने महिलाओं के सुखी जीवन के लिए उनकी भावनाओं को समझने पर जोर दिया।
जागृति गौड़ ने देश की आजादी को लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी बात रखी। आशा शर्मा ने कहा कि यदि हम अपने विचारों और जीवन में भगवान राम के आदर्शों को अपनाते हैं, तो मन में रावण जैसी बुराइयों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
कुलविंदर सिंह ने प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की, जबकि डॉ. सुदेश चुग ने वर्तमान परिस्थितियों में महिलाओं के जीवन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। सुखदेव सिंह ने समाज सुधार पर जोर दिया और पोली बराड़ ने कन्या पूजन पर कविता सुनाई। सरिता नौरिया ने अपनी कविता के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने का संदेश दिया। उमा नसरा ने मां की पूजा के महत्व पर विचार रखे, जबकि रुपिंदर संधू ने पंजाबी कविता के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
गुरदर्शन सिंह ने गजल के माध्यम से अपने विचार साझा किए और कनीज मंजूर ने छोटी-छोटी कविताओं के जरिए अपनी बात प्रस्तुत की।
अंत में डॉ. उमा शर्मा और आशा शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। इस तरह कार्यक्रम उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और सभी से सराहना प्राप्त की।






