जयपुर, 01 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तंग): जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने हाईटेंशन (एचटी) बिजली लाइनों के कारण लंबे समय से पट्टा प्राप्त करने में आ रही दिक्कतों का सामना कर रहे भूखंड मालिकों को राहत देने के लिए प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब ऐसे भूखंडों की मंजूरी और पट्टा जारी करने से संबंधित कार्रवाई जेडीए के जोन स्तर पर ही पूरी की जा सकेगी, जिनके ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइन को मौके से हटाया जा चुका है।
इस संबंध में जेडीए की भवन मानचित्र समिति की 437वीं बैठक में 18 अगस्त 2026 को निर्णय लिया गया था। अब इस निर्णय को लागू करने के लिए प्राधिकरण ने 31 अक्टूबर 2026 को विस्तृत आदेश जारी कर दिए हैं। नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य उन भूखंडों के मामलों का निपटारा करना है, जो बिजली लाइन की मौजूदगी के कारण पहले स्वीकृत योजनाओं में अनुमोदन से बाहर रह गए थे।
पुरानी योजनाओं के भूखंडों को भी मिलेगा लाभ
जेडीए के आदेश के अनुसार, पहले स्वीकृत ऐसी आवासीय योजनाओं में जहां मंजूरी के समय एचटी लाइन मौजूद थी और उसके कॉरिडोर में आने वाले भूखंडों को स्वीकृति नहीं दी गई थी, अब बिजली लाइन हटाए जाने या स्थानांतरित किए जाने के बाद संबंधित मामलों में जोन स्तर पर कार्रवाई की जा सकेगी।
इससे उन योजनाओं के भूखंड मालिकों को भी राहत मिलेगी, जिनकी योजना के अन्य हिस्सों को तो मंजूरी मिल गई थी, लेकिन एचटी लाइन से प्रभावित क्षेत्र को स्वीकृति से बाहर रखा गया था।
मूल नक्शे में संशोधन के बाद जारी हो सकेगा पट्टा
नए प्रावधान के तहत एचटी लाइन हटने या शिफ्ट होने के बाद प्रभावित क्षेत्र को योजना में शामिल करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। इसके बाद योजना के बिक्री योग्य क्षेत्रफल (सेलेबल एरिया) की जांच निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार की जाएगी।
यदि संशोधित योजना का बिक्री योग्य क्षेत्रफल नियमानुसार पाया जाता है और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मूल स्वीकृत नक्शे में संशोधन करने की कार्रवाई जोन स्तर पर ही की जा सकेगी। संशोधन के बाद संबंधित भूखंड मालिकों को लीज डीड अथवा संशोधित लीज डीड जारी करने का रास्ता साफ होगा।
सड़क प्रस्ताव वाले मामलों पर लागू नहीं होगा प्रावधान
जेडीए ने इस व्यवस्था के दायरे को स्पष्ट करते हुए बताया है कि यह प्रावधान उन्हीं मामलों में लागू होगा, जहां एचटी लाइन के साथ सड़क प्रस्तावित नहीं है। यानी प्रत्येक मामले में योजना की स्थिति, बिजली लाइन हटाए जाने की पुष्टि और निर्धारित तकनीकी एवं नियोजन मानकों की जांच आवश्यक होगी। केवल बिजली लाइन हट जाने के आधार पर स्वतः पट्टा जारी नहीं होगा, बल्कि संबंधित नियमों और शर्तों की पूर्ति के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी
गौरतलब है कि कई भूखंड मालिकों की ओर से जेडीए के समक्ष यह समस्या उठाई जा रही थी कि भूखंडों के ऊपर से एचटी लाइन गुजरने के कारण उन्हें पट्टे जारी नहीं हो सके थे। बाद में संबंधित स्थानों से बिजली लाइन हटाए जाने के बावजूद पुरानी स्वीकृति प्रक्रिया के चलते उनके मामले लंबित बने हुए थे।
जेडीए के इस नीतिगत फैसले से ऐसे मामलों में दोबारा लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम होगी। जोन स्तर पर ही नक्शे में संशोधन, भूखंडों की मंजूरी और लीज डीड जारी करने की कार्रवाई संभव होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
प्राधिकरण ने इन मामलों में मंजूरी की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। हालांकि, अंतिम स्वीकृति संबंधित योजना की पात्रता, तकनीकी जांच और निर्धारित नियमों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।






