Wednesday, November 4, 2026
HomePatialaपंजाबी भाषा में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है: विधानसभा स्पीकर कुलतार...

पंजाबी भाषा में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है: विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां

पटियाला, 2 नवंबर 2026 (छत्रपाल सिंह): भाषा विभाग पंजाब की ओर से पंजाब सरकार के संरक्षण में मनाए जा रहे पंजाबी माह-2026 के कार्यक्रमों का आज पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उद्घाटन किया। भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के उपकुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने की, जबकि पंजाब साहित्य अकादमी चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. आत्म रंधावा ने मुख्य भाषण दिया। इस अवसर पर युवा सूफी गायक याकूब ने अपनी मधुर और साफ-सुथरी गायकी से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। समारोह के दौरान 10 लेखकों को सर्वश्रेष्ठ पंजाबी पुस्तक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाबी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसी ताकत है, जिसमें क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है। इसी भाषा के माध्यम से समय-समय पर समाज में बड़े परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुओं ने अपनी वाणी के माध्यम से पूरी मानवता को प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश देकर बहुत बड़ा उपकार किया है। उनकी महानता को दुनिया हमेशा नमन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल पुरस्कार वितरित करने का नहीं, बल्कि लेखकों की मेहनत और उनकी महान साहित्यिक उपलब्धियों को सलाम करने का अवसर है। पुस्तक लिखना केवल कागज पर शब्द लिखने का काम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भाषा और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। उन्होंने सभी से अपील की कि पंजाबी भाषा को सबसे पहले अपने घर और परिवार में अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पंजाबी भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अपने स्वागत भाषण में भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर ने कहा कि पंजाब दिवस मनाने का उद्देश्य अपने इतिहास और अतीत की गलतियों को याद रखना है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि हमारे पास दुनिया का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है, लेकिन हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का उचित संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण हम अपेक्षित खुशहाली हासिल नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि पंजाबियों के सपने बड़े हैं, सीखने की क्षमता भी बहुत है और हम तरक्की भी खूब करते हैं, लेकिन इसके बावजूद हम दुनिया के अच्छे समाजों में अपनी जगह नहीं बना पाए। इसका बड़ा कारण यह है कि हम दूसरों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते और इसी प्रतिस्पर्धा में आपस में बंट जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश तो आजाद हो गया, लेकिन हमने अपना वतन खो दिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के उपकुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से स्नातकोत्तर स्तर पर विज्ञान के पाठ्यक्रमों में पंजाबी विषय लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विज्ञान, वाणिज्य और इंजीनियरिंग विषयों की पाठ्यपुस्तकों को पंजाबी भाषा में तैयार करने का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाबी विश्वविद्यालय हमेशा से पंजाबी भाषा, संस्कृति और पंजाबी पहचान के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयासरत रहा है।

मुख्य भाषण देते हुए डॉ. आत्म रंधावा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में पंजाबी भाषा को समय और तकनीक के अनुरूप विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा नैतिक मूल्यों और सामाजिक रिश्तों की गरिमा को भी आगे बढ़ाती है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पंजाबी भाषा की समृद्ध रिश्तेदारी व्यवस्था में देखने को मिलता है। इस अवसर पर गायक याकूब ने ‘छल्ला’, ‘दमादम मस्त कलंदर’, ‘माहिया’ सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर समारोह का माहौल खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया।

पुस्तक पुरस्कारों के तहत 10 लेखकों को सम्मान

इस अवसर पर पंजाबी सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कारों के तहत विभिन्न साहित्यिक विधाओं में 10 पुरस्कार और एक डॉ. सुरजीत पातर युवा साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया। इन पुरस्कारों के लिए वर्ष 2025 के दौरान प्रकाशित पुस्तकों को आमंत्रित किया गया था। विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों और विषय विशेषज्ञों से पुस्तकों का मूल्यांकन करवाने के बाद सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों का चयन किया गया। प्रत्येक पुरस्कार के तहत 31,000 रुपये की नकद राशि, एक शॉल और सम्मान चिह्न प्रदान किया जाएगा। इन पुरस्कारों के लिए विभिन्न साहित्यिक विधाओं की कुल 282 पुस्तकें प्राप्त हुई थीं।

पुरस्कारों के तहत भाई वीर सिंह पुरस्कार (आत्मकथा) वरियाम मस्त की पुस्तक ‘रंगमंच दे दिन’, नानक सिंह पुरस्कार (उपन्यास) जसपाल मानखेड़ा की पुस्तक ‘हवेलियांला’, प्रिंसिपल सुजान सिंह पुरस्कार (कहानी) भूपिंदर सिंह मान की पुस्तक ‘लाल रत्ता’ और गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी पुरस्कार (निबंध) अजय तनीर की पुस्तक ‘जादूनगरी दे जादूगर’ को प्रदान किया गया। इसी तरह ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर पुरस्कार (कविता) डॉ. नवदीप कौर की पुस्तक ‘अहिल्या’, ईश्वर चंद्र नंदा पुरस्कार (नाटक) कुलबीर मलिक की पुस्तक ‘डाक नित्त आवेगी…’, प्रो. गुरदयाल सिंह पुरस्कार (अनुवाद) जंग बहादुर गोयल की पुस्तक ‘जंगल तों पार (सीता रतनामल)’, एम.एस. रंधावा पुरस्कार (संपादन) प्रिंसिपल लवली एस. पन्नू की पुस्तक ‘पुआधी लोक-कावि (टप्पे ते जक्कड़ियां)’ और डॉ. अतर सिंह पुरस्कार (शोध) डॉ. धर्म सिंह की पुस्तक ‘प्रगट भए गुरु तेग बहादर’ को प्रदान किया गया। डॉ. सुरजीत पातर युवा साहित्य पुरस्कार उभरते कवि सुरखाब की पुस्तक ‘वैतरणी’ को दिया गया।

इसके अलावा विशेष सम्मान के तहत डॉ. रणजीत सिंह, भूपिंदर दुले टोरंटो, हरकीरत कौर चहल कनाडा, प्रो. अरविंदर सिंह घनौर और सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के रूप में मनजिंदर सिंह को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रिंसिपल एस.एस. ऋषि, डॉ. बलवीर कौर पंधेर, रणजीत सिंह ऑस्ट्रेलिया, डॉ. गुरमुख सिंह, डॉ. सुरजीत सिंह, पद्मश्री प्राण सभरवाल, स्वामी अंतरनीरव, गुरप्रीत मानसा, जगदीश राय कूलरिया, दर्शन बुट्टर, बलविंदर संधू, अवतारजीत सिंह, पवन हरचंदपुरी सहित विभिन्न जिलों के भाषा अधिकारी और साहित्य जगत से जुड़ी अनेक हस्तियां उपस्थित रहीं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments