नई दिल्ली, 6 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। दीपावली का पांच दिवसीय उत्सव भाई दूज के साथ संपन्न होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इसी परंपरा के चलते बाजारों में सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और घरेलू सामान की खरीदारी की जाती है। हालांकि, इन परंपराओं का महत्व अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकता है।
इन वस्तुओं की खरीदारी को माना जाता है शुभ
सोना-चांदी और सिक्के: धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है। इन्हें समृद्धि और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
धातु के बर्तन: पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन खरीदना भी कई परिवारों में शुभ माना जाता है। इन्हें घर में नई शुरुआत और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं: दीपावली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई प्रतिमाएं खरीदने की परंपरा है। इन्हें पूजा स्थल पर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है।
झाड़ू और साबुत धनिया: कई क्षेत्रों में धनतेरस पर झाड़ू और साबुत धनिया खरीदने की परंपरा है। लोक मान्यताओं में झाड़ू को स्वच्छता तथा धनिया को समृद्धि और बरकत का प्रतीक माना जाता है।
कपड़े और घरेलू सामान: इस अवसर पर नए कपड़े, रसोई के उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना भी आम परंपरा है।
किन वस्तुओं की खरीदारी से बचने की मान्यता है?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर लोहे की वस्तुएं, काले रंग का सामान, कांच और एल्युमिनियम के बर्तन तथा चीनी मिट्टी से बनी वस्तुएं खरीदने से परहेज किया जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और क्षेत्रीय मान्यताएं हैं, कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं।
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सोना-चांदी खरीदते समय हॉलमार्क, शुद्धता, वजन और बिल की जांच जरूर करें। घरेलू उपकरणों की खरीद पर वारंटी और कीमत की तुलना करना भी जरूरी है। धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल खरीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली से भी जुड़ा है।