Tuesday, September 8, 2026
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इसरों ने खारिज की निजीकरण की खबरें, भूमिका कम होने से भी किया इनकार

बेंगलुरु, 7 सितंबर 2026 (अमनदील सभरवाल): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  ने अपने निजीकरण या भूमिका कम किए जाने को लेकर चल रही खबरों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। इसरो ने स्पष्ट किया कि वह देश में उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और रणनीतिक मिशनों के लिए प्रमुख संस्था के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

एक विस्तृत बयान इसरों का अगला अध्याय: भारत के राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम का नेतृत्व’ में इसरो ने कहा कि मीडिया के एक हिस्से में संस्था की भविष्य की भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें और गलत सूचनाएं सामने आ रही हैं। इनमें इसरो को निजी हाथों में देने या इसकी भूमिका कम करने की बातें शामिल हैं। इसरो ने कहा, “ये दावे पूरी तरह निराधार और गलत हैं। इसरो का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसकी महत्ता कम की जाएगी।”

निजी क्षेत्र की भागीदारी से बढ़ेगा अंतरिक्ष क्षेत्र

इसरो के मुताबिक अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी का उद्देश्य इसरो की भूमिका कम करना नहीं, बल्कि भारत के पूरे अंतरिक्ष इकोसिस्टम को और बड़ा एवं मजबूत बनाना है। इससे इसरो अगली पीढ़ी की तकनीकों और जटिल मिशनों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा, जबकि उद्योग परिपक्व तकनीकों के उत्पादन और व्यावसायीकरण को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाएंगे।

संस्था ने कहा कि बदलाव इसरो की महत्ता में नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के पैमाने और ढांचे में आ रहा है।

2020 से जारी हैं अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार

इसरो ने बताया कि 2020 से शुरू हुए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों को भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के माध्यम से संस्थागत रूप दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य भारत में एक बड़ा, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष इकोसिस्टम तैयार करना है।

इसके तहत स्टार्टअप, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष क्षेत्र की विभिन्न वैल्यू चेन में काम करने का अवसर मिल रहा है। इसरो ने कहा कि इन सुधारों को निजीकरण नहीं, बल्कि इकोसिस्टम के विस्तार और क्षमता में वृद्धि के रूप में देखा जाना चाहिए।

किस संस्था की क्या भूमिका होगी?

इसरो ने भविष्य के ‘इसरो के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम के बारे में भी जानकारी दी। इसके अनुसार:

  • अंतरिक्ष विभाग अंतरिक्ष नीति के लिए समग्र दिशा तय करेगा।
  • इसरो उन्नत अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और राष्ट्रीय मिशनों का नेतृत्व करेगा।
  • इन-स्पैस गैर-सरकारी संस्थाओं की भागीदारी को सुगम और अधिकृत करेगा।
  • एन.एस.आई.एल. परिपक्व तकनीकों के व्यावसायीकरण और उद्योग आधारित उपयोग को आगे बढ़ाएगा।

इसरो ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और नियामकीय मानदंडों को ध्यान में रखते हुए जहां उचित होगा, वहां निजी क्षेत्र को संचालन और सेवाओं में भागीदारी दी जाएगी।

इसरो का फोकस अब अगली पीढ़ी की तकनीक पर

इसरो ने कहा कि भविष्य में उसका ध्यान मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, डीप-स्पेस और ग्रहों के मिशनों सहित फ्रंटियर तकनीकों पर अधिक रहेगा।

इसके साथ ही संचार, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन के लिए उन्नत पेलोड, सेंसर, प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का भी विकास किया जाएगा। इसरो के मुताबिक स्थापित लॉन्च वाहनों और सैटेलाइट जैसी परिपक्व एवं नियमित रूप से तैयार की जाने वाली प्रणालियों का उत्पादन उद्योग या सरकारी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से बड़े स्तर पर किया जा सकता है।

2047 तक भारत के बड़े अंतरिक्ष लक्ष्य

स्पेस विज़न 2047 के तहत भारत का लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना, 2040 तक भारतीय मानव चंद्र मिशन करना, दोबारा उपयोग किए जा सकने वाले लॉन्च सिस्टम विकसित करना और चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की लगातार खोज करना है।

इसरो ने कहा कि इन बेहद जटिल और तकनीकी मिशनों के लिए संस्था का उन्नत अनुसंधान और प्रौद्योगिकी क्षमताओं पर केंद्रित रहना जरूरी है।

भारत में 450 से अधिक स्पेस स्टार्टअप

इसरो ने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े 450 से अधिक स्टार्टअप सामने आ चुके हैं। ये कंपनियां लॉन्च वाहन, सैटेलाइट, प्रोपल्शन, ग्राउंड सिस्टम, अर्थ ऑब्जर्वेशन, कम्युनिकेशन और स्पेस एप्लीकेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

इसरो के मुताबिक भारत की मौजूदा अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर की है और 2033 तक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी को 44 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

EOS-05 की दूसरी ऑर्बिट रेजिंग भी सफल

इसी बीच इसरो ने बताया कि EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट की दूसरी ऑर्बिट रेजिंग प्रक्रिया रविवार शाम 7 बजे सफलतापूर्वक पूरी की गई। इस दौरान LAM इंजन को 338.9 सेकंड तक चलाया गया और मैन्युवर के बाद सैटेलाइट की अनुमानित एपोजी 35,786 किलोमीटर रही।

इसरो ने कहा कि सैटेलाइट की स्थिति सामान्य है।

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