चंडीगढ़, 21 जुलाई 2026:राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के तहत लगभग 15,056 करोड़ रुपये की स्वीकृति देकर हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई गति प्रदान की है। इस वित्तीय सहायता से राज्यभर में 6,175 ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाओं को सहयोग मिला है, जिनके माध्यम से सिंचाई, ग्रामीण सड़कें, पेयजल सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है।
यह जानकारी नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान साझा की गई, जिसमें हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नाबार्ड प्रदेश में ग्रामीण परिवर्तन और कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की प्रगति मजबूत ग्रामीण अवसंरचना, टिकाऊ कृषि, वित्तीय समावेशन और सशक्त सामुदायिक संस्थाओं पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और जमीनी स्तर के संगठनों को मिलकर आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में कार्य करना होगा।
उन्होंने बताया कि नाबार्ड की रियायती ब्याज दरों पर उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता से अनेक महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकीं, जिससे किसानों और ग्रामीण समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के डिजिटलीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि उन्हें अधिक पारदर्शी, सक्षम और प्रभावी बनाया जा सके।
समारोह के दौरान मुख्य सचिव ने हरियाणा में नाबार्ड की विकासात्मक पहलों पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा कृषि ऋण, परियोजना मूल्यांकन और कृषि वित्तपोषण से संबंधित यूनिट कॉस्ट बुक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली पैक्स, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), कारीगरों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
नाबार्ड की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी ने बताया कि संस्था ने हरियाणा में 710 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण किया है। इसके अलावा 131 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सशक्त बनाया गया है, जिनसे 63,369 किसान, जिनमें 14,017 महिलाएं शामिल हैं, जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने 28 एफपीओ को 11.12 करोड़ रुपये की ऋण सहायता तथा 9 एफपीओ को 60.38 लाख रुपये की इक्विटी ग्रांट प्रदान की है। इसके साथ ही जलवायु-अनुकूल कृषि, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर), सब्जी क्लस्टर और अन्य टिकाऊ कृषि परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी नाबार्ड की योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2022-23 से अब तक 5,010 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई, हस्तशिल्प तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण देकर उनकी आजीविका को मजबूत बनाया गया है।






